संत कृपालु महाराज के प्रवचन में भगदड़, 63 श्रद्धालु मरे 80 ज़ख्मी
March 4, 2010, 3:22 PM
हिंदी ख़बर
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प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में संत कृपालु महाराज के आश्रम में गुरुवार को मची भगदड़ में 63 लोगों की मौत हो गई और 80 घायल हो गए। मरने वालों में अधिकतर बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। इस बीच मायावती सरकार ने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पूरे मामले की जांच इलाहाबाद के मंडलायुक्त को सौंपी गई है और उन्हें 24 घंटे में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने 35 बच्चों और 26 महिलाओं की मौत की पुष्टि की है। सिंह ने कहा कि 80 घायलों को इलाहाबाद और प्रतापगढ़ के अस्पतालों में भर्ती कराया जिसमें से 36 को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है। गंभीर रूप से घायल लोगों का उपचार चल रहा है। सिंह ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजा देने का फैसला प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राहत व बचाव कार्य के निरीक्षण के लिए राज्य सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों स्वामी प्रसाद मौर्य और नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मौके पर भेजा है।
गौरतलब है कि जिले के कुंडा के पास मनगढ़ में कृपालु महाराज के आश्रम स्थित मंदिर में उनकी पत्नी के श्राद्ध पर भंडारे का कार्यक्रम था, जिसमें लोगों को खाना खिलाया जा रहा था और कपड़े वितरित किए जा रहे थे। इस कार्यक्रम में करीब 8 से 10 दस हजार लोग एकत्रित हुए थे। आश्रम का मुख्य द्वार, जो कि काफी बड़ा और ऊंचा है, के गिरने से यह भगदड़ मची। इससे पहले प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक महेश मिश्रा ने संवाददाताओं से 63 लोगों की मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कई घायलों को कृपालु महाराज के ही आश्रम स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मिश्रा ने कहा कि आश्रम प्रशासन की तरफ से इस आयोजन के संबंध में जिला प्रशासन से न तो कोई सुरक्षा मांगी गई थी और न ही प्रशासन को इसे बारे में सूचित किया गया था। मिश्रा ने साफ किया कि यह आश्रम का निजी कार्यक्रम था। आश्रम के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने कहा कि आगे आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया है कि आश्रम प्रशासन की तरफ से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। आश्रम के सभी द्वार बंद कर दिए गए थे और केवल एक ही द्वार को खोला गया था। |