थल सेना का 30 साल का इंतजार खत्म, मिली एम-777 होवित्जर तोपें

Edited by: Shiwani_Singh Updated: 19 May 2017 | 11:16 AM
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नई दिल्ली। बोफोर्स घोटाले के 30 साल के लंबे इंतजार के बाद थल सेना को अमेरिका से गुरुवार को दो बहुत हल्की होवित्जर तोपें मिली, जो लंबी दूरी तक मार करनेवाली 145 तोपों के लिए दिये आर्डर का हिस्सा है। इनमें से ज्यादातर चीन से लगी सीमा पर तैनात की जाएगी।

एम-777 ए-2 बहुत हल्की होवित्जर (यूएलएच) तोपों की अधिकतम रेंज 30 किलोमीटर है। इन्हें बीएई सिस्टम ने बनाया है। इन्हें गोलाबारी के परीक्षण के लिए पोखरण ले जाया जा रहा है। थल सेना को इन तोपों की बहुत जरूरत है और भारत ने करीब 5,000 करोड़ रुपए की लागत से 145 होवित्जर तोपों की आपूर्ति के लिए पिछले साल नवंबर में अमेरिका के साथ सरकार के स्तर पर एक सौदा किया था।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि नई तोपों को चीन की सीमा पर तैनात करने की उम्मीद है। इनमें से 25 तोपों को तैयार स्थिति में भारत लाया जाएगा, जबकि शेष तोपें महिंद्रा डिफेंस के साथ साझेदारी कर बीएई भारत में ही कलपुर्जे जोड़कर तैयार की जाएगी। 155 एमएम, 39 कैलिबरवाली तोपें भारतीय गोला-बारुद दागेगी।

सेना ने एक बयान में कहा है कि अनुबंध की शर्तों के मुताबिक अनुबंधित एजेंसी द्वारा ‘फायरिंग टेबल' तैयार की जा रही है। इसके तैयार हो जाने पर तीन और तोपें प्रशिक्षण के लिए सितंबर 2018 में आपूर्ति होंगी। इसके बाद मार्च 2019 से पांच तोप प्रति माह शामिल की जाएगी, जब तक कि 2021 के मध्य तक पूरी खेप नहीं पूरी हो जाती।

बीएई सिस्टम के एक अधिकारी ने बताया, थल सेना के तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम के लिए उसके साथ इस नयी हथियार प्रणाली को समन्वित किए जाने में अमेरिकी सरकार की मदद करना हम जारी रखेंगे।' होवित्जर तोपों को सर्वप्रथम करीब 10 साल पहले बीएई से खरीदने का प्रस्ताव था।

भारत ने इससे पहले 1980 के दशक के मध्य में स्वीडिश रक्षा कंपनी बोफोर्स से होवित्जर तोपें खरीदी थी। इस सौदे में दलाली ने सेना द्वारा तोप की खरीदारी को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया था।