अखिलेश और शिवपाल का झगड़ा दिखावटी, असली नायक हैं प्रतीक

Author: Hindi Khabar
Updated On : 2016-10-26 14:36:06
अखिलेश और शिवपाल का झगड़ा दिखावटी, असली नायक हैं प्रतीक

लखनऊ। समाजवादी पार्टी कुनबे में सुलह, सफाई और लीपापोती दौर शुरू हो गया है, लेकिन यह रेशमी साड़ी पर टाट के पैबंद जैसा मसला दिखाई पड़ रहा है। सियासी मंच पर एक तरफ अखिलेश यादव और दूसरी तरफ चाचा शिवपाल यादव जरूर दिखाई दे रहें हैं, लेकिन सियासी भूचाल का किरदार यानी तीसरे नायक की एंट्री होनी अभी बाकी है।

जी हां, सपा कुनबे में मचे भूचाल के असली नायक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव हैं, जिन्हें सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए यह सब राजनीतिक सरकस हुआ और उसे एक बार छिपाने के लिए पूरा परिवार लीपापोती करने में जुट गया है। तो आइए समझते है कि क्या है पूरा मसला, जिसकी वजह कुछ और है बताया कुछ और जा रहा है-

दरअसल सपा परिवार में मचे संग्राम की नायिका मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता हैं, जो पुत्रमोह में कैकेई बन गई हैं! लेकिन मुलायम सिंह यादव के घर में जिस दौलत को लेकर अखिलेश की सौतेली माँ साधना गुप्ता कैकेई बन गई उस दौलत के असली उत्तराधिकारी तो सीएम अखिलेश ही हैं। जी हां, दरअसल, प्रतीक यादव मुलायम की संतान ही नहीं हैं। ये बात अलग है कि मुलायम प्रतीक के अभिवावक रहे हैं और दूसरी शादी करने के बाद उन्होंने प्रतीक को अपना नाम जरूर दिया है।


मुलायम ने प्रतीक को अपना नाम दिया:

सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट PE-2 (A)/ 2007 / ACU- IV / CBI / NEW DELHI के मुताबिक- मुलायम सिंह यादव की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिस प्रतीक को मुलायम ने अपने बेटे के रूप में अपनाया वह मुलायम सिंह का पुत्र ही नहीं है। बल्कि वह तो साधना गुप्ता के पहले पति चन्द्र प्रकाश गुप्ता का पुत्र है, जो यूपी के फर्रुखाबाद जिले के रहने वाले हैं। सीबीआई की जांच रिपोर्ट के पैरा-7 के मुताबिक मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता का जन्म साल 1962 में औरेया जिले के विदुना में रहने वाले कमलापति के घर में हुआ था।

प्रतीक साधना के पहले पति की संतान:
सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट PE-2 (A)/ 2007 / ACU - IV / CBI / NEW DELHI- इस रिपोर्ट के पैरा-7 के मुताबिक कमलापति की बेटी साधना गुप्ता का विवाह फर्रुखाबाद के रहने वाले चंद्र प्रकाश गुप्ता के साथ 4 जुलाई 1986 को हुआ था। शादी के एक साल बाद 7 जुलाई 1987 को फतेहगढ़ के एक अस्पताल में साधना और चंद्र प्रकाश का एक पुत्र हुआ, जिसका नाम प्रतीक रखा गया।

रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि शादी के दो साल बाद 1988 में साधना ने अपने पति को छोड़ दिया और बेटे को साथ लेकर अलग हो गयीं। मामला अदालत की चौखट तक पहुंचा। लेकिन फर्रुखबाद की अदालत से 5 मार्च 1990 को इस पारिवारिक विवाद में तलाक का फैसला सुना दिया।

याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इस मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम ने प्रतीक के स्कूल जाकर तमाम रिकार्ड खंगाले जिसमें प्रतीक की माँ का नाम साधना लिखा हुआ था। इसके बाद सीबीआई को साल 1994 के रिकार्ड खंगालते वक्त एक ऐसा रिकार्ड हाथ लगा, जिसमें प्रतीक यादव के घर का पता मुलायम सिंह यादव के आधिकारिक निवास का पता दर्ज था।

सीबीआई के इस स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक साधना गुप्ता के जीवन में मुलायम की एंट्री 1994 में दस्तावेजों पर हो गयी। इसके बाद साल 2000 में प्रतीक के अभिभावक के रूप में मुलायम का नाम स्कूल में दर्ज हुआ और 23 मई 2003 को मुलायम की पहली पत्नी मालती देवी के निधन के बाद मुलायम ने उनसे विवाह कर के उन्हें अपनी पत्नी का दर्ज दिया।


सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट PE-2 (A)/ 2007 / ACU - IV / CBI / NEW DELHI- इस रिपोर्ट के मुताबिक सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 में फिरोजाबाद की शिकोहाबाद तहसील के एक गरीब किसान सुधर सिंह के घर हुआ था। उनकी माता का नाम मूर्ति देवी था।

तंगहाली से जूझ रहे मुलायम के पिता सुधर सिंह इसके बाद सैफई आकर बस गए। मुलायम पांच भाई और चार बहनों के परिवार में दूसरे नंबर के बेटे हैं। मुलायम के सबसे बड़े भाई का नाम अभय राम यादव है। जो पेशे से किसान हैं। मुलायम से छोटे भाई रतन सिंह भी किसानी का काम करते हैं।

चौथे नंबर के भाई शिवपाल सिंह हैं। इसके अलावा उनके सबसे छोटे भाई राज पाल यादव हैं, जो साल 2006 में यूपी वियर हाउसिंग कारपोरेशन में बाबू थे। मुलायम के सबसे बड़े भाई अभय राम के बेटे मैनपुरी से सांसद धर्मेंद्र यादव हैं। राम गोपाल मुलायम सिंह के चचेरे भाई हैं।

इस मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने इस बात का भी खुलासा अपनी रिपोर्ट में किया है कि मुलायम के बेटे अखिलेश का जन्म 1 जुलाई 1973 को पहली पत्नी मालती देवी के पुत्र हैं। मालती देवी का 23 मई 2003 को देहांत हो गया था।

अखिलेश यादव का विवाह 24 नवंबर 1999 को आर।सी।एस। रावत की बेटी डिंपल के साथ हुआ था। फिलहाल मुलायम के खिलाफ अदालत में सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की जांच की याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने मीडिया को बताया कि उन्हें इस मामले में कोर्ट से अभी कोई राहत नहीं मिली है।

मुलायम के परिवार में बिखराव का कारणः

दरअसल, मुलायम कुनबे में मचे घमासान के पीछे की सारी पटकथा उनकी दूसरी समधन अम्बी बिष्ट लिख रही हैं। वो मुलायम परिवार के लड़ाई में मंथरा का रोल निभा रहीं हैं। वो मुलायम की समधन अम्बी बिष्ट ही हैं जिन्होंने अखिलेश की सौतेली मां को कैकई बना दिया।

सौतेले बेटे के बढ़ते रसूख से जली भुनी साधना गुप्ता ने अपने पति मुलायम को ऐसा उकसाया कि मजबूर बाप अपनी बड़ी संतान का ही विरोधी बन गया। इतना ही नहीं रोजाना घर में मच रही इस कलह से तंग आकर अखिलेश ने अपने परिवार के साथ अलग रहने का फैसला किया।

सूत्रों के मुताबिक मुलायम के घर में मची इस पारिवारिक कलह के पीछे प्रतीक यादव की सास अम्बी बिष्ट का अहम रोल है। सत्ता के गलियारे में अपना रुतबा बनाने के लिए अम्बी विष्ट ने ही अपनी बेटी अपर्णा यादव को पहले राजनीति में आने के लिए उकसाया।

लेकिन जब मुलायम ने अपर्णा को लखनऊ कैंट से विधानसभा चुनाव लड़ाने का मन बना लिया तो उनके मन में और भी लालच जाग गई। यही नहीं अपने दमाद प्रतीक के जरिए अम्बी बिष्ट ने समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही लखनऊ विकास प्राधिकरण कि सारी मलाईदार योजनाओं का काम हथिया लिया।

सूत्रों के मुताबिक यूपी में सपा कि सरकार बनते ही अपर्णा की मां अम्बी बिष्ट की दसों अगुंलियां 'घी' में लपालप डूबी गई। पालिका सेवा से प्राधिकरण में सालों पहले कर अधीक्षक के पद पर आईं अम्बी बिष्ट ने सपा की सरकार बनते ही पहले डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर अपनी तरक्की कराई और अब उनके पदोन्नति की पत्रावली प्राधिकरण के संयुक्त सचिव पद के लिए शासन को भेजी गई है। बताया जाता है कि अपनी बेटी के जरिये वो ये तरक्की भी पाने की कोशिश में हैं।

दिन ब दिन बढ़ते रसूख के चलते अम्बी विष्ट की लालच और बढ़ती चली गई और वह अपने दामाद प्रतीक यादव को मुख्यमंत्री बनाने का तानाबाना बुनने लगीं। सबसे पहले बेटी अपर्णा और प्रतीक को उन्होंने राजनीति में आने के लिए उकसाया लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने मुलायम सिंह की पत्नी और अपनी समधन साधना गुप्ता को उकसाया कि नेताजी अपनी पहली पत्नी के बेटे को तो पूरा राजपाठ सौंपे दे रहे हैं, लेकिन प्रतीक को वह सीएम कब बनाएंगे?

खुद मंथरा बन चुकी अपर्णा की माँ अम्बी ने अखिलेश की सौतेली मां साधना को कैकेई बना दिया। साधना के कैकेई बनते ही इतना बड़ा राजपाठ खड़ा करने वाले सपा मुखिया पुत्र वियोग में एक तरफ जहां भीतर ही भीतर कुंठित हुए जा रहे थे, वहीं घर में उनके कदम रखते ही साधना अपने बेटे प्रतीक को सीएम बनाए जाने की मांग करने लगीं।

घर में शुरू हुए इस घमासान का फायदा उठाने के लिए शिवपाल यादव ने भी अपनी चालें चलनी शुरु कर दी। पहले से मुख्यमंत्री बनाए जाने की फिराक में बैठे मुलायम के छोटे भाई शिवपाल ने भी इस चिंगारी में फूंक मारकर उसे आग का रूप दे दिया। सबसे पहले तो उन्होंने अपने भतीजे सीएम अखिलेश की खिलाफत कर शुरु की लेकिन जब बात बनती नहीं दिखी तो उन्होंने अपनी भाभी साधना को मोहरा बना कर चालें चलना शुरू कर दिया।

ये बात अलग है कि ये मुलायम परिवार का आंतरिक मसला है, लेकिन वो सूबे की सत्ता पर भी काबिज हैं तो ऐसे में उनकी इस अन्तर्कलह का खामियाजा समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश की जनता को भी भुगतना पड़ेगा।


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