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BJP की काली कमाई का खुलासा, बिना पैन-आधार के लिया करोड़ों का चंदा

Edited By: Ankur Maurya
Updated On : 2017-08-18 19:50:17
BJP की काली कमाई का खुलासा, बिना पैन-आधार के लिया करोड़ों का चंदा via
BJP की काली कमाई का खुलासा, बिना पैन-आधार के लिया करोड़ों का चंदा

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' और ना खाएंगे ना खाने देंगे जैसी बड़ी-बड़ी बांते करके सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कली कमाई सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक जबसे बीजेपी सत्ता में आई है तब से बीजेपी ने करीब 159 करोड़ रुपए बिना किसी ब्यौरा दिए कमाए हैं।

दरअसल, एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने पिछले चार साल में राजनीतिक दलों के मिले चंदे का विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का बड़ा हिस्सा अज्ञात स्रोतों से आया था। बीजेपी को इन सालों में करीब 159 करोड़ रुपए अज्ञात स्रोत से मिले हैं यानी चंदा देने वालों का पैन, आधार या निवास का ब्योरा उपलब्ध नहीं है। राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपए से अधिक चंदा देने वाले दानदाताओं को ब्योरा हर साल चुनाव आयोग को देना होता है।

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पिछले चार सालों में तीन हजार से ज्यादा दान अज्ञात स्रोत से मिला है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार साल 2012 से लेकर साल 2016 तक विभिन्न राजनीतिक दलों को 1933 दानदाताओं से 384 करोड़ रुपए चंदा मिला जिन्हें देने वालों का पैन नंबर नहीं था। वहीं इस दौरान 1546 दानदाताओं से मिले करीब 355 करोड़ रुपए देने वाले का रिहायशी पता नहीं दिया गया था।

एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक दलों को वित्त वर्ष 2014-15 में करीब 60 प्रतिशत चंदा कार्पोरेट कंपनियों से मिला। साल 2012 से 2016 के बीच कारोबारी घरानों ने पांच राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को 956.77 करोड़ रुपया चंदा दिया। इन चार सालों में ज्ञात स्रोत से मिले कुल चंदे का 89 प्रतिशत कारोबारी घरानों से मिला था।

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पांच सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई और सीपीएम में कार्पोरेट कंपनियों से सबसे अधिक 705.81 करोड़ रुपए चंदा बीजेपी को मिला। दूसरे स्थान पर कांग्रेस रही जिसे इस दौरान 198 करोड़ रुपए कार्पोरेट कंपनियों से मिला। सीपीआई और सीपीएम को कार्पोरेट कंपनियों सबसे कम क्रमशः चार और 17 प्रतिशत चंदा मिला।

एडीआर के अनुसार बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने चुनाव आयोग को बताया कि उसे वित्त वर्ष 2012-13 से 2015-16 के बीच 20 हजार रुपये से अधिक चंदा किसी से नहीं मिला। साल 2013-13 में राजनीतिक दलों को सबसे अधिक चंदा रियल एस्टेट की कंपनियों ने दिया था। उसके बाद के तीन सालों में निर्माण सेक्टर की कंपनियों ने राजनीतिक दलों को सबसे अधिक चंदा दिया।


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