नोटबंदी कालेधन का समाधान नहीं: मोहम्मद यूनुस

Edited by: Editor Updated: 20 Nov 2016 | 09:23 AM
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ढ़ाका। भारत में काले धन के खिलाफ सरकार के विमुद्रीकरण को लेकर सभी ने अपनी अलग-अलग राय दी है। बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक के जरिये क्रान्ति लाने वाले और नोबेल पुरस्कार मोहम्मद यूनुस ने भी इस पर अपनी राय दी है। यूनुस ने एक अख़बार से बातचीत में भारत में नोटबंदी को लेकर कहा कि विमुद्रीकरण ठीक वैसे ही है जैसे मैं अपने घर के फर्श पर फैले पानी को पूरी तरह साफ़ कर दूं और पानी का नल बंद ना करूं।

सूत्रों के मुताबिक मोहम्मद यूनुस ने कहा कि नोटबंदी कालेधन का समाधान नहीं है। इसके लिए हमें पहले सिस्टम को सुधारना होगा, जिसके जरिये यह समस्या उत्पन्न हुई है। बता दें कि बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक ग़रीब लोगों को स्वरोजगार के लिए सामूहिक रूप से कर्ज़ देता है।

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दरअसल, यूनुस ने बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक के जरिये उस वक़्त क्रांति शुरू की जब बांग्लादेश गरीबी से जूझ रहा था। यूनुस ने लोगों को अपने कारोबार शुरू करने के लिए ग्रामीण बैंक के जरिये लोन देना शुरू किया। आम तौर पर इस बैंक के ग्राहक ऐसे लोग हैं, जो बड़े बैंकों से कर्ज़ प्राप्त करने में अपने को असहाय पाते हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 1974 में बांग्लादेश में आए भयानक अकाल से सबक लेते हुए अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने एक ऐसे बैंक का ख़ाका तैयार किया, जिसकी पहुँच हर ज़रूरतमंद के दरवाज़े तक हो। वर्ष 1976 में प्रोफ़ेसर यूनुस ने चटगाँव विश्वविद्यालय के सहयोग से प्रयोग के तौर पर कुछ गाँवों में इस योजना को लागू किया।