मां महागौरी देती है ब्यूटी विद ब्रेन, ऐसे करें प्रसन्न

Edited by: Editor Updated: 09 Oct 2016 | 08:32 AM
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नोएडा। नवरात्रि के नौ दिनों का पावन पर्व अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। आज सभी घरों में मां के आठवें स्वरूप महागौरी की अराधना की जा रही है। महागौरी के एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ से अभय मुद्रा में हैं, तीसरे हाथ में डमरू सुशोभित है और चौथा हाथ वर मुद्रा में है। मां का वाहन वृषभ यानि की बैल है। महागौरी की कथा में कहा गया है कि माता ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की है। कठोर तप कर भोले-भंडारी को प्रसन्न कर उन्हें पति के रूप में प्राप्त किया है। कथा में कहा जाता है कि जब शिव को पति के रूप में पाने के लिए महागौरी तपस्या कर रही थी, उस समय उनका शरीर घूल और मिट्टी से ढ़क गया था।

जब भगवान शंकर ने गंगाजल से इनके शरीर को धोया तब गौरी जी का शरीर गौर व दैदीप्यमान हो गया और तभी से देवी महागौरी के नाम से विख्यात हुई। इनकी गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की गयी है। इनके सभी वस्त्र और आभूषण भी सफेद हैं। नवरात्रे के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा का विशेष महत्व हैं। कहा जाता है माँ महागौरी अपने भक्तों को अनेक कष्टो से मुक्त करने वाली माता हैं। इनकी आराधना से मनुष्य के अनेक पाप समाप्त हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। माता महागौरी की कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो जिन लोगों को ब्यूटी के साथ ब्रेन चाहिए उन्हें माता गौरी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

नवरात्री के आंठवे दिन विवाहित स्त्रियाँ आस्था के साथ माँ गौरी की पूजा करती हैं और सदा सुहागिन रहने का आशिर्वाद मांगती हैं और माता को चुनरी चढ़ाती है। कहा जाता है कुंवारी कन्याओं को माता की पूजा अर्चना करने से मनचाहा वर मिलता है तथा माँ महागौरी अपने भक्तों के सभी दुखों को हरकर उनकों सुखमय जीवन प्रदान करती हैं। मान्यता है कि नवरात्र की पूजा व व्रत कन्या पूजन के बिना अधूरी होती है। अंतिम दिन जो भी श्रद्धा भाव से कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन करवाता है उसकी सारे मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। कुछ लोग नौ कन्याओं के साथ भैरों बाबा के रूप में एक छोटे बालक को भी भोजन करवाते हैं। ऐसा माना जाता है कि माता की अराधना के साथ भैरौं बाबा की अराधना से मां प्रसन्न होती है।