नसीमुद्दीन सिद्दीकी की वजह से नप गए पवन पांडे

Edited by: Editor Updated: 26 Oct 2016 | 05:54 PM
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लखनऊ। अयोध्या विधानसभा से विधायक और वन राज्य मंत्री पवन पांडे की समाजवादी पार्टी से बर्खास्तगी की सबसे बड़ी वजह नसीमुद्दीन सिद्दीकी हैं। जी हां, यह सच है।

हिन्दी ख़बर सूत्र बताते हैं कि मायावती के राइट हैंड और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी की वजह से ही पवन पांडे को सपा के बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

दरअसल, सपा एमएलसी आशू मलिक ने राज्यमंत्री पवन पांडे पर आरोप लगाया था कि पवन पांडे ने उनके साथ सीएम आवास में मार-पीट की थी और इस दौरान उन्हें कई तमाचे भी जड़े थे।

सपा कुनबे की पारिवारिक कलह, सुलह, सफाई और लीपापोती में उलझे खबरनवीसों के लिए यह खबर चौंकाने वाली हो सकती है। हिन्दी ख़बर सूत्र कहते हैं कि बसपा राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में जो धमाका किया उसने ही मंत्री पवन पांडे की विदाई की इबारत लिख दी थी।

प्रेस कांफ्रेंस में सिद्दीकी ने आशु मलिक पर पवन पांडे द्वारा की हाथापाई की घटना की कड़े शब्दों में निन्दा की थी और कहा था कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश सरकार में मुसलमान पीटे जा रहे हैं. जबकि बसपा में मुसलमानों को मुकम्मल सम्मान मिलता है।

 नसीमुद्दीन सिद्दीकी के उक्त बयान के बाद समाजवादी पार्टी और अखिलेश सरकार दबाव में आ गई। अन्य मुसलमानों और कई मुस्लिम संगठनों ने भी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ आवाज़ बुलंद करना शुरू कर दिया था। अपने परंपरागत वोटबैंक में बढ़ती नाराजगी से घबराकर सपा आलाकमान ने आनन-फानन में पवन पांडे को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया और यह साबित करने की कोशिश की सपा अभी भी मुसलमानों की हमदर्द है।

आपको बता दें कि जिस तरह से मायावती ने 9 अक्टूबर को कांशीराम के दसवें परिनिर्वाण दिवस पर दलित और मुसलमानों के एकजुट होने का आह्वान किया था उससे सियासी पंडितों ने अगली सरकार के तौर पर बसपा को फेवरिट मानना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफज़ल सिद्दीकी लगातार मुसलमानों को बसपा के साथ तेज़ी से जोड़ते जा रहे हैं। दलित वोट भी एकजुट होता जा रहा है। वैश्य, ब्राह्मण और ठाकुर मतदाता भी मायावती को मुख्यमंत्री के तौर पर पहली पसंद मान रहे हैं। जिसकी वजह से यूपी की अन्य राजनीतिक पार्टियों के हौसले पस्त होते जा रहे हैं।