केंद्र ने 10 बैंकों से कर्मचारियों की सुविधा में कटौती करने के दिए निर्देश

Edited by: Web_team Updated: 20 Mar 2017 | 10:44 AM
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रांची। सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों के कर्मचारियों को केंद्र सरकार ने बड़ा झटका दिया है। केंद्र ने कर्मचारियों की सुविधाओं में कटौती करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, इलाहाबाद बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, विजया बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, आंध्रा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और देना बैंक को पत्र भेजा है।

इस पत्र में सरकार ने सुविधाओं के लिए बैंक यूनियनों के साथ समझौता करने की बात कही है। सुविधाओं में लीव टैवेल कंसेशन (एलटीसी), वेतनमान बढ़ोतरी और अन्य शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इन बैंकों की तरफ से केंद्र से 500-500 करोड़ की पूंजीगत सहयोग राशि मांगी गई थी। केंद्र ने बैंकों की मांग को यह कह कर अस्वीकृत कर दिया है कि इन बैंकों की संपत्ति और लाभ की स्थिति संतोषप्रद नहीं है।

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केंद्र ने त्रैमासिक लक्ष्य के आधार पर बैंकों के पूंजीगत अनुदान को तय किया है। बैंकों के निदेशक मंडल, प्रबंधन और कर्मियों को तय लक्ष्य के अनुसार काम करने और लक्ष्य प्राप्ति के निर्देश भी दिए गए हैं। केंद्र के अनुसार, कर्मचारियों की सुविधा जरूरत के हिसाब से तय की जायेगी। एसबीआइ कैपिटल मार्केट्स से इस विषय में सुझाव भी मांगा गया है।

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा है कि बैंक कर्मी बदलाव के लिए सहयोग करने को तैयार हैं। यूनियन और संघों पर जबरन कोई चीज थोपे जाने का विरोध किया जायेगा। वेंकटचलम के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बयान दिया है कि आइडीबीआइ बैंक का निजीकरण जुलाई 2018 माह से शुरू हो जाएगा।

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इससे पहले पीजे नायक कमेटी ने भी बैंकों के निजीकरण की अनुशंसा कर दी है। पूर्व में भी 1998-99 में इस तरह के समझौते को लागू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनाईटेड बैंक और इंडियन बैंक तीन वर्ष में बेहतर स्थिति में आ गए थे।