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आतंकवाद के खिलाफ चीन व रूस आए भारत के साथ

Edited By: Editor
Updated On : 2016-10-16 12:20:57
आतंकवाद के खिलाफ चीन व रूस आए भारत के साथ
आतंकवाद के खिलाफ चीन व रूस आए भारत के साथ

गोवा। आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने की मुहिम में जुटे भारत को उस समय अहम सफलता मिली जब रूस और चीन जैसी महाशक्तियां आतंकवाद के विरोध में भारत के साथ खड़े नजर आए। रूस और चीन आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालों पर लगाम लगाने के पक्ष में दिखे।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात में आतंकवाद को पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। इतना ही नहीं पुतिन और जिनपिंग ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलेंरेंस की मोदी की नीति का भी समर्थन किया। रूस ने परोक्ष तौर पर उरी हमले के बाद भारत की तरफ से किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का भी समर्थन किया।

रूस ने भारत से कहा है कि आतंकवाद से निपटने के लिए जो भी ताकत हो उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जबकि चीन के राष्ट्रपति ने भारत के साथ आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाइ करने के लिए मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत करने का प्रस्ताव दिया।

आपको बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक घंटा द्विपक्षीय मुद्दों पर वार्ता के बाद प्रेस कांफ्रेंस में मोदी ने शनिवार को कहा, 'पुतिन का यह साफ तौर पर मानना है कि आतंकवाद से हमें हर तरीके से निपटने की जरूरत है।

हम इस क्षेत्र के लिए चुनौती बने सीमा पार आतंक के खिलाफ लड़ाई में समर्थन करने के लिए रूस का आभार व्यक्त करते हैं। गौरतलब है कि शनिवार को गोवा में भारत और रूस के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते में दोनों देशों के बीच 16 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए है।


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