भागवत को हिन्दू आतंकवादी घोषित करना चाहती थी कांग्रेस: रिपोर्ट

Edited by: Shiwani_Singh Updated: 15 Jul 2017 | 08:56 AM
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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले एक बड़ा खुलासा सामने आया है। इस खुलासे से संसद में हंगामा होने के आसार तय नजर आ रहे हैं। एक अंग्रेजी न्यूज चैनेल के हवालें से ख़बर है कि कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार अपने अंतिम दिनों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को आतंकवादियों की सूची में डालने की तैयारी में थी।

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रिपोर्ट के मुताबिक भागवत को हिन्दू आतंकवाद के जाल में फंसाने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए कांग्रेस अगुवाई वाली यूपीए सरकार के कई मंत्री कोशिश में लगे थे। आपको बता दें कि अजमेर और मालेगांव ब्लास्ट के बाद यूपीए सरकार ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी सब के सामने रखी थी। इसी के तहत यूपीए सरकार भागवत को फंसाना चाहती थी। इसी के तहत सरकार द्वारा एनआईए के बड़े अधिकारियों पर दबाव डाला जा रहा था।

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इसी कारण वश जांच अधिकारी और कुछ आला ऑफिसर अजमेर और कई अन्य बम विस्फोट मामले में तथाकथित भूमिका के लिए भागवत से पूछताछ करना चाहते थे। यह अधिकारी यूपीए के मंत्रियों के आदेश पर काम कर रहे थे, जिसमें तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे भी शामिल थे। करंट अफेयर मैगजीन कारवां में फरवरी 2014 में संदिग्ध आतंकी स्वामी असीमानंद का इंटरव्यू छपा था।

इस समय वो पंचकुला जेल में थे। इस इंटरव्यू में कथित तौर पर भागवत को हमले के लिए मुख्य प्रेरक बताया। इसके बाद यूपीए ने एनआईए पर दबाव बनाना शुरू किया, लेकिन जांच एजेंसी के मुखिया शरद यादव ने इससे इनकार कर दिया।

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वे लोग इंटरव्यू के टेप की फ़रेंसिक जांच करना चाहते थे। जब चीजें आगे नहीं बढ़ीं तो एनआईए ने केस को बंद कर दिया। रिपोर्ट के बारे में मीडिया से बात करते हुए, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'सरकार को इस पत्राचार को सार्वजनिक करने पर एक नजर रखना होगा, लेकिन मैं मानता हूं कि इस खुलासे के बाद, यह पूरी तरह सार्वजनिक क्षेत्र में आना चाहिए.'