अर्थव्यवस्था के आलोचकों को अब PM ने लिया आड़े हाथ, आकंड़ों के साथ दिया जवाब

Edited by: Shivani Updated: 05 Oct 2017 | 09:54 AM
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नई दिल्ली। नोटबंदी और जीएसटी के कारण डगमागाती अर्थव्यवस्था पर भाजपा सरकार लगातार आलोचना का सामना कर रही है। इसके चलते खुद प्रधानमंत्री ने आलोचकों को करारा जवाब दिया। इसके साथ ही मोदी ने निशाना साधने वालों को 'शल्य' प्रवृत्ति का बताया। मोदी ने द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के गोल्डन जुबली ईयर समारोह में भाग लेते हुए विपक्ष के सवालों का जवाब आंकड़ों के साथ दिया।

मोदी ने सरकार की उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए कहा कि सरकार ने 28 साल से लटका बेनामी संपत्ति कानून बनाया। मोदी ने कहा कि सरकार ने कालेधन पर कानून बनाया, नोटबंदी करने का साहसिक फैसला लिया। सरकार के फैसलों पर आकंड़े के साथ बात करते हुए मोदी ने कहा कि विपक्ष जो महसूस करता है वहीं कहते हैं वह आकंड़ो के आधार पर बात नहीं करते हैं।

पीएम ने अर्थव्यवस्था पर सवाल खड़े करने वालों को शल्य बताते हुए कहा कि कुछ लोग निराशा फैलाने वाले होते हैं। इसलिए ऐसे लोगों की पहचान करनी आवश्यक है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही बीजेपी के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिंहा ने अपने लेख के द्वारा देश की अर्थव्यवस्था पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने नोटबंदी को एक गलत फैसला और जीएसटी को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया था।

इनके अलावा राहुल गांधी भी हमेशा ही सरकार पर निशाना साधते आए है। हाल ही में गुजरात दौरे पर गए राहुल ने सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि बीजेपी द्वारा लगातार झूठ बोलने के कारण विकास पागल हो गया है। इसके साथ ही राहुल हर मौके पर सरकार को नोटबंदी और जीएटी को लेकर घेरते रहते हैं।

बीजेपी में मंत्री रहे अरुण शौरी ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि नोटबंदी के जरिए बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद करना का काम किया गया। इस वक्त देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है और यह संकट जीएसटी की वजह से पैदा हुआ है। सरकार को घेरते हुए अरुण ने कहा था कि सिर्फ ढाई लोग ही पूरी सरकार चला रहे हैं और यहां किसी को नहीं सुना जाता है।

पीएम ने इन सभी को घेरते हुए कहा कि ये लोग बिना आकंड़े के ही सरकार पर हमला बोलते हैं। इसके साथ ही मोदी ने सरकार के द्वारा किए गए कार्यों पर आकड़े पेश करते हुए आलोचकों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि डोकलाम विवाद के चलते भी कई लोगों ने देश में निराशा फैलाई थी।