डॉक्टरों की कमी कैसे पूरा करेंगे CM त्रिवेंद्र ?

Edited by: Ankur_maurya Updated: 28 Sep 2017 | 10:57 PM
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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर चल रही राज्य सरकार की मुहिम को दरकिनार कर रक्षा मंत्रालय ने श्रीनगर और अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को टेकअप करने से मना कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को पत्र लिखकर कहा है कि सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा इन दोनों मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन का भार उठाने में सक्षम नहीं है। रक्षा मंत्रालय के इस फैसले के बाद राज्य सरकार के साथ साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की बाट जोह रहे उत्तराखण्ड वासियों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।

राज्य गठन से लेकर अब तक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे उत्तराखण्ड वासियों की किस्मत एक बार फिर दगा दे गई है। मौजूदा डबल इंजन की ताकत भी काम नहीं आई और रक्षा मंत्रालय ने प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को एक झटके में बड़ा झटका दे दिया । प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के भारी-भरकम खर्च को देखते हुए सरकार ने इन्हें सेना के सुपुर्द करने का मन बनाया था ताकि सेना इन मेडिकल कॉलेजों को संचालित करे और प्रदेश को नियमानुसार डॉक्टर मिल सकें।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तत्कालीन रक्षा मंत्री अरूण जेटली को पत्र लिखकर वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान श्रीनगर और निर्माणाधीन अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को सेना द्वारा संचालित करने अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री के अनुरोध के जवाब में अब रक्षा मंत्रालय ने इन दोनों मेडिकल कॉलेजों के संचालन में असमर्थता जता दी है । इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि मामला रक्षा मंत्रालय से जुड़ा है लिहाजा फिर से बात की जाएगी।


गौरतलब है कि राज्य गठन से लेकर अब तक उत्तराखंड में चिकित्सकों की भारी कमी रही है। प्रदेश में न तो आधुनिक चिकित्सा उपकरण समुचित संख्या में हैं और न ही डॉक्टर। हर सरकार की तरह त्रिवेन्द्र सरकार के सामने भी चिकित्सा सुविधाओं को दुरूस्त करने की सबसे बड़ी चुनौति थी। लिहाजा सीएम ने सेवानिवृत्त स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को सरकारी सेवा में रखे जाने के बारे में भी थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत से मुलाकात की थी। ये मसला भी अभी ठंडे बस्ते में ही है। एक और गौर करने वाली बात ये कि अरुण जेटली के स्थान पर निर्मला सीतारमण अब रक्षा मंत्री हैं।

बीती महीने जेटली की ओर से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को मिले पत्र में कहा गया है कि सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा में प्रशिक्षित प्राध्यापकों, गैर अध्यापन कर्मचारियों और नर्सों की सीमित उपलब्धता है लिहाजा उत्तराखण्ड के श्रीनगर और अल्मोड़ा कॉलेज को सेना टेकअप नहीं कर सकती। अगर सेना श्रीनगर और अल्मोड़ा के मेडिकल कॉलेज को संचालित करती तो राज्य को बड़ी राहत मिलनी तय थी। रक्षा मंत्रालय के इस फैसले से डबल इंजन की सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं लिहाजा सरकार फिर से रक्षा मंत्रालय से वार्ता की बात कह रही है और यही सलाह विपक्षी कांग्रेस भी सरकार को दे रही है।