दिल्ली को मिली राहत, 15 दिन के लिए रद्द हुआ जाट आंदोलन

Edited by: Web_team Updated: 20 Mar 2017 | 08:55 AM
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नई दिल्ली। आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे जाट आंदोलन में हरियाणा के फतेहाबाद में रविवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई, जिसमें एक एसपी, एक डीएसपी समेत 30 लोग घायल हो गए। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की दो बसों को भी आग के हवाले कर दिया।

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गौरतलब है कि इसके बाद दिल्ली में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने बैठक कर सोमवार को होने वाले दिल्ली कूच आंदोलन को 15 दिनों के लिए वापस ले लिया है। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह तथा पीपी चौधरी मौजूद थे।

बता दें कि खट्टर ने एआइजेएएसएस के अध्यक्ष यशपाल मलिक के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्र और राज्य दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए जल्द आरक्षण देने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इस पर उन्होंने राज्य की जनता से शांति और भाईचारा बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदर्शनकारियों पर 2010 से 2017 के बीच दर्ज हुए मामलों की पुन: जांच करेगी और जाटों को पूरा न्याय दिया जाएगा और प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों और विकलांग हुए लोगों को स्थाई नौकरियां और सहायता प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों की भूमिका की जांच का भी आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आरक्षण के लिए हाईकोर्ट में लंबित चल रहे विधेयक पर जैसे ही फैसला होगा, हम उन्हें संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

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वहीं, मलिक ने कहा कि अब जाट दिल्ली नहीं आ रहे हैं। हमने दिल्ली कूच के अपने कार्यक्रम और आंदोलन को रद्द कर दिया है। राज्य सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि जाट समुदाय राज्य में अधिकतर स्थानों पर धरना नहीं देंगे, लेकिन कुछ स्थानों पर यह प्रदर्शन जारी रहेगा। ज्ञात है कि जाट समुदाय के लोग 29 जनवरी से हरियाणा के कई हिस्सों में धरने पर बैठे हुए हैं।