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याद है 2011 विश्वकप में धोनी का लगाया ऐतिहासिक छक्का!

Edited By: Ankur Maurya
Updated On : 2017-04-02 22:37:55
याद है 2011 विश्वकप में धोनी का लगाया ऐतिहासिक छक्का!
याद है 2011 विश्वकप में धोनी का लगाया ऐतिहासिक छक्का!

नई दिल्ली। 2 अप्रैल का वो दिन कौन भूल सकता है जब एक पल के लिए सबकी सांसे थम सी गई थी, भारत की 125 करोड़ जनता बस चाह रही थी तो एक जीत, जी हां बात विश्व कप 2011 की जब महेंद्र सिंह धोनी ने मलिंगा की गेंद पर लंबा छक्का लगा कर इस खिताब पर 28 साल बाद भारतीय टीम ने कब्जा कर एक बार फिर इतिहास रच डाला था।

2011 विश्व कप का फाइनल मुकाबला भारत और श्रीलंका के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया था। भारत इस विश्व कप में केवल एक मैच हारा था लेकिन सबको करारी मात देते हुए जिस तरह भारतीय टीम फाइनल में पहुंची थी और जिस तरह टीम और उसके खिलाड़ी शानदार लय में थे इन सबको देखकर लग ही रहा था की फाइनल महज एक औपचारिकता है।

इस मैच के लिए पूरा स्टेडियम खचा-खच भरा हुआ था पूरे स्टेडियम में मच रही 'इंडिया-इंडिया' की गूंज पूरे भारत में गूंज रही थी। श्रीलंका ने टॉस जीतते हुए पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, लेकिन भारतीय गेंदबाजों के सामने श्रीलंका के शुरुआती सलामी बल्लेबाज टिक ना सके और भारतीय फिल्डरों का क्या कहना, श्रीलंका को ऐसे जकड़ कर रखा था की उनको एक-एक रन बनाना भारी पड़ रहा था, लेकिन मैच में श्रीलंका ने वापसी तब की जब दिग्गज बल्लेबाज महिला जयवर्धने ने अपने तेवर दिखाने शुरु किए थे।

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एक समय के लिए श्रीलंका को 250 का स्कोर खड़ा कर पाना मुश्किल लग रहा था ऐसे समय में महिला जयवर्धने ने अपनी टीम को संकट से बाहर निकाला और शानदार शतक लगाते हुए 103 रनों की कीमती पारी खेली और इस पारी की बदौलत श्रीलंका ने भारत को 275 रनों का लक्ष्य दिया था। इसके बाद भारतीय फैंस को यह लक्ष्य बहुत छोटा लग रहा था।

जी हां क्योंकी भारतीय टीम में ऐसे बल्लेबाज मौजूद थे जिनका नाम सुनकर ही बड़े-बड़े गेंदबाज कांपने लगते थे, लेकिन श्रीलंका भी अपनी जीत के लिए जी जान से खेल रही थी। 275 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को शुरुआती झटके जल्द ही लग गए थे। महज 31 रन पर 2 विकेट गिर गए थे। जब वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर आउट हुए तो भारतीय फैंस में खामोशी छा गई थी।

भारतीय टीम के लिए संकट का समय तब आया जब 114 रन पर विराट कोहली का तीसरा विकेट गिर गया। अब भारतीय फैंस चिंतित होकर ईश्वर से प्रार्थना करने लगे थे। इसके बाद क्रीज पर मौजूद थे गौतम गंभीर। वहीं कोहली के आउट होने के बाद युवराज सिंह को क्रिज पर आना था लेकिन, सबको चौंकाते हुए कप्तान धोनी खुद युवराज से पहले क्रीज पर आ गए थे।

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ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्होंने तय कर लिया हो कि वह विश्व कप लेकर ही लौटेंगे। अब भारतीय टीम को जरूरत थी तो एक लंबी साझेदारी की जिसको गंभीर ने धोनी के साथ मिलकर बखूबी निभाया। दोनो बल्लेबाज सोची-समझी रणनीति के तहत बल्लेबाजी कर रहे थे। दोनो के बीच 109 रनों की शानदार साझेदारी हुई थी। गौतम मंभीर शतक से चुक गए थे लेकिन उन्होंने 97 रनों की संकटमोचक पारी खेलते हुए भारतीय टीम को संकट से बाहर निकाला था।

इसके बाद धोनी का साथ देने आए युवराज सिंह। युवरजा ने मलिंगा की खतरनाक योर्कर गेंदों का सामना करते हुए वह एक छोर पर डटे रहे वहीं दूसरी छोर पर महेंद्र सिंह धोनी भारतीय टीम को जीत के करीब पहुंचा रहा थे और भारत धिरे-धिरे जीत के करीब पहुंच रहा था और वो छ्क्का कौन भूल सकता है जिसको धोनी ने लगाकर उसे ऐतिहासिक छक्का बना दिया था, जिसको धोनी लगाकर बस उस गेंद की ओर देखते ही रह गए थे।

धोनी के इस छक्के को लगाते ही देश में दिवाली बन गई थी, चारो तरफ जीत का जश्न और आंखो में खुशी के आंसू बह रहे थे। सभी खिलाड़ियों के आंखे नम हो गई थी और वानखेड़े स्टेडियम वह इतिहास लिख रहा था जो सालों-सालों तक याद किया जाएगा। एक ऐसा विश्व कप समाप्त हुआ था, जिससे पहले शायद ही क्रिकेट इतिहास में किसी ने देखा हो।

                                                                                                   -अंकुर मौर्या, वैब डेस्क


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