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बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार : विजया दशमी

Edited By: Editor
Updated On : 2016-10-11 10:14:06
बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार : विजया दशमी
बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार : विजया दशमी

नोएडा। शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन अर्थात दशमी को हम विजया दशमी यानी दशहरा के रूप में मनाते है। विजया दशमी के दिन मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने अधर्म पर धर्म की एवं अहंकार पर स्वाभिमान की विजय हासिल करते हुए अभिमानी लंकापति रावण का वध किया था। दशहरा पर्व पर हथियारों के पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन हथियारधारी अपने-अपने हथियारों का पूजन करते हैं। इस दिन को नए काम शुरू करने के लिए बेहद ही शुभ माना जाता है।

दशहरे के दिन वनस्पतियों का पूजन किया जाता है। रावण दहन के पश्चात शमी नामक वृक्ष की पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में एक-दूसरे को सम्मान प्रदान कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसके साथ ही अपराजिता (विष्णु-क्रांता) के पुष्प भगवान राम के चरणों में अर्पित किए जाते हैं। नीले रंग के पुष्प वाला यह पौधा भगवान विष्णु को प्रिय माना जाता है। दशहरे का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है, अपितु ये भारत की संस्कृति के साथ एकता का भी प्रतीक माना जाता है।

दशहरा नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। देशभर में दशहरे का उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। जगह-जगह मेले लगते हैं, दशहरे से पूर्व रामलीला का आयोजन किया जाता। इस दौरान नवरात्रि भी होती हैं, कहीं-कहीं रामलीला का मंचन होता है, तो कहीं जागरण होते हैं। दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इस दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।


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