गरीबों के लिए फीकी और बेरंग हो गई है दिवाली

Author: Hindi Khabar
Updated On : 2016-10-29 21:38:22
गरीबों के लिए फीकी और बेरंग हो गई है दिवाली

नई दिल्ली। दिवाली खुशियों का त्योहार हर किसी के लिए यह त्योहार बहुत सारी खुशीयां लाता है। यह त्योहार सबके लिए खास होता है। हर किस्म के लोग इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं। छोटे-बड़े हर समुदाय के लोग दिवाली के दिन नए कपड़े पहनकर जश्न मनाते हैं। पूरा शहर रोशनी और आतिशबाजी से जगमग करता है।

गरीब हो या अमीर हर कोई अपनी छोटी सी दुनिया में इस त्योहार को अपने मुताबिक मनाता है, लेकिन अब ये त्योहार बस अमीरों का ही त्योहार बनकर रह गया है। जी हां, दिवाली बस अमीरों का त्योहार बनकर रह गई है। अमीर लोग बेहिसाब शॉपिंग करते हैं। खूब कपड़े खरीदते हैं, घर सजाते हैं, लाइट्स लेकर आते हैं। उनके घरों में खूब मिठाईयां बनती है। उनके लिए त्योहार मतलब बस खरीदारी ही रह गई है।

इन दिनों चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि हर किसी के लिए त्योहारों पर नए कपड़े खरीदना महंगा हो गया है। पहले त्योहारों का मतलब एक साथ परिवार के साथ वक्त बिताना और मजे करना होता था,लेकिन अब त्योहार का मतलब पैसे से खरीदारी तक सीमित रह गया है। बाजार में हर चीज इतनी महंगी हो गई है कि गरीब के सामर्थ से बाहर हो गई है। ऐसे में उनके लिए त्योहार फीका और बेरंग हो गया है।

दिवाली के सही माइने अगर ढूंढना है तो हमें अमीर गरीब का ये फर्क खत्म करना होगा। त्योहार सबके लिए एक जैसे होते हैं। इस दिन अमीर गरीब का फर्क खत्म हो जाता है। गरीब के लिए त्योहार आता है और चला जाता है। वो तो बस अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में दो वक्त की रोटी जुगाने में ही लगा रहता है।