क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का हुआ निधन

Edited by: Editor Updated: 26 Nov 2016 | 02:01 PM
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नई दिल्ली। क्यूबा के  क्रांतिकारी नेता एवं पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। क्यूबा के एक सरकारी टीवी ने कास्त्रों के निधन की पुष्टि की है। अब शनिवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

कास्त्रों को क्यूबा में कम्युनिस्ट क्रांति का जनक माना जाता है और वह आधुनिक विश्व में सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेताओं में से एक माने जाते थे। एक तरफ जहां पूरी दुनिया में वामपंथ फीका पड़ता जा रहा है, वहीं क्यूबा में अभी भी लाल झंडा फहराया जाता है।

13 अगस्त, 1926 को जन्मे कास्त्रो को क्यूबा में कम्युनिस्ट क्रांति का जनक माना जाता है और उन्होंने 49 साल तक क्यूबा में शासन किया। वह फरवरी 1959 से दिसंबर 1976 तक क्यूबा के प्रधानमंत्री और फिर फरवरी 2008 तक राष्ट्रपति रहे। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया और उनके भाई राउल कास्त्रो को यह पदभार मिला।

1956 में उन्होंने क्यूबा क्रांति का शंखनाद किया और तमाम उठापटक के बाद 1959 में उन्होंने क्यूबा के तानाशाह बटिस्टा का तख्तापलट कर दिया। इसके बाद कास्त्रो एक राष्ट्रीय हीरो के रूप में बनकर उभरे जिनका लोहा अभी भी क्यूबा में माना जाता रहा।

कास्त्रो ने ऐसा दावा किया है कि अमेरिकी एजेंसी CIA ने 600 से ज्यादा बार उनकी हत्या करने की योजना बनाई लेकिन वह हर बार नाकाम रही। अमेरिका के खिलाफ अपनी मनमानी करने वाले इस सदी के सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाले कास्त्रो ने अपनी शर्तों पर जिंदगी जी।

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया। पीएम ने ट्विट करके लिखा, वे 20वीं शताब्दी के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शामिल एक महान व्यक्तित्व थे। भारत ने आज एक अच्छे दोस्त को खो दिया।