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सरकारी बैंकों में नहीं होगी 5 साल से अधिक की FD

Edited By: Editor
Updated On : 2016-10-11 02:21:15
सरकारी बैंकों में नहीं होगी 5 साल से अधिक की FD
सरकारी बैंकों में नहीं होगी 5 साल से अधिक की FD

नई दिल्ली। पिछले एक दशक में सरकारी बैंकों में लोन की मांग में कमी आने के कारण और सरकारी बैंकों की फंडिंग कॉस्ट ज्यादा होने के कारण राष्ट्रीयकृत बैंक अब 5 साल से अधिक के फिक्सड डिपॉजिट स्वीकार नहीं करने की घोषणा की है। इस बारे में बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि पावर प्लांट्स या पोर्ट्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लोन की मांगों में कमी आई है। चूंकि ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए आमतौर पर 7 से 12 साल के लोन लिए जाते हैं, जिससे लंबे समय की अवधि वाली एफडी पर असर पड़ा है।

ऐसा करने के बाद बैंकों को दो तरह से फायदा मिल रहा है, पहला फायदा ब्याज दरों में गिरावट देखने को मिल रही है, दूसरा फायदा यह है कि ग्राहक लंबे समय के लिए ऋण नहीं ले रहे हैं। ऐसे में लॉन्ग एफडी स्वीकार करने से उनका रिस्क बढ़ सकता है। जब ब्याज दर में कमी का दौर होता है, तब ग्राहक दो से तीन साल के लिए कर्ज लेते हैं और उसे बाद में कम रेट पर री-फाइनेंस करते हैं। इससे उनकी ब्याज देनदारी कम होती है।

यूको बैंक के एमडी आरके ठक्कर का कहना है कि 'बैंकों ने ज्यादातर एफडी एक साल के लिए स्वीकार किए हैं। हम ग्राहक को एक या दो साल की एफडी करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि हमें फंडिंग कॉस्ट और असेट-लायबिलिटी मिस मैच के बीच संतुलन बनाना होगा। हायर रेटिंग वाली जिन कंपनियों ने पहले 12 या 13 पर्सेंट पर लोन लिया था, वे इसकी री-फाइनैंसिंग 10 पर्सेंट या इससे भी कम रेट पर कर रही हैं।


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