मुस्लिम के साथ लिव-इन में रह सकती है हिंदू लड़कीः हाईकोर्ट

Edited by: Editor Updated: 29 Nov 2016 | 03:38 PM
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अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने एक 19 साल की हिंदू लड़की को उसके 20 साल के मुस्लिम बॉयफ्रेंड के साथ रहने की अनुमति दे दी है, जो कि कानून बालिग है। बनासकांठा जिले के दूरदराज के ग्रामिण क्षेत्र में रहने वाली इस लड़की की इच्‍छा पर यह अनुमति दी गई है।

दरअसल, लड़का और लड़की दोनों बचपन के दोस्त हैं। दोनों एक साथ स्कूल में पढ़ते थे। इसी बीच दोनों को एक दूसरे से प्यार हुआ और फिर शादी करने का निर्णय ले लिया।

जानकारी मुताबिक दोनों अपना धर्म नहीं बदलना चाहते थे इसलिए स्पेशल मैरिज एक्ट का सहारा लिया। लेकिन दनों की उम्र 21 साल से कम होने के कारण दोनों विधिवत रूप से शादी नहीं कर सकते थे। इसके बाद दोनों ने मैत्री करार करने का निर्णय लिया।

इसके बाद दोनों अपने परिवारों से अलग होकर एक साथ रह रहे थे। इसी सितंबर महीने में लड़की के परिजन उसे जबरदस्ती अपने साथ ले गए। अपने परिवार के साथ कपड़े के व्यवसाय में लगे लड़के ने इसके विरोध में हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दी कि उसकी गर्लफ्रेंड को उसके घरवाले जबरदस्ती साथ ले गए हैं।

जस्‍टिस अकिल केयू रेशी और जस्‍टिस बीरेन वैष्‍णव ने कहा, 'हमारा समाज शादी की संस्‍था और इसकी पवित्रता पर काफी दबाव डालता है। लिव-इन रिलेशनशिप का उदाहरण मोटे तौर पर मेट्रो सिटीज और अन्‍य शहरी केंद्रों तक ही सीमित है। इसके बावजूद हमें हमारी कानूनी सीमा को पहचानना चाहिए जो कि एक वयस्‍क व्यक्ति को वहां रहने पर मजबूर करता है जहां व नहीं रहना चाहता है।

मामले के विवरण अनुसार, स्‍कूल में लड़का और लड़की साथ पढ़ते थे और स्‍कूल के ही दिनों से दोनों में प्‍यार हो गया। दोनों में से कोई भी अपना धर्म बदलने को तैयार नहीं हैं और उनके पास केवल एक ही विकल्‍प है कि वे स्‍पेशल मैरिजेस एक्‍ट के अंतर्गत रजिस्‍टर्ड हों।