मैंने टाटा-डोकोमो मामले में मनमर्जी नहीं कीः मिस्त्री

Author: Hindi Khabar
Updated On : 2016-11-02 18:26:30
 मैंने टाटा-डोकोमो मामले में मनमर्जी नहीं कीः मिस्त्री

नई दिल्ली। साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद शुरु हुआ विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। मिस्त्री ने एक बार फिर टाटा संस व रतन टाटा पर बयान देकर इस विवाद को और बढ़ा दिया। मिस्त्री ने कहा है कि यह कहना गलत और शरारत भरा है कि उन्होंने टाटा-डोकोमो के मामलें में जो कार्रवाई की वह अपनी मर्जी से की और रतन टाटा को उसकी जानकारी नहीं थी।

मिस्त्री ने इस तरह की बातों को भी खारिज किया है कि डोकोमो के खिलाफ जिस ढंग से मुकद्दमा लड़ा उसे रतन टाटा शायद मंजूर नहीं करते। उन्होंने बयान में कहा कि मिस्त्री ने हमेशा कहा कि टाटा-समूह को कानून के अनुसार अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए।

गौरतलब है कि जापान की एनटीटी डोकोमो कंपनी का टाटा समूह के साथ शेयरों के भुगतान को लेकर मुकदमा चल रहा है। डोकोमो ने नवंबर 2009 में टाटा टेलीसर्विसेज में 26.5 प्रतिशत हिस्सेदारी ली थी। उस समय प्रति शेयर 117 रुपये के भाव पर सौदा 12,740 करोड़ रुपये का था। उस समय यह सहमति हुई थी कि पांच साल के अंदर कंपनी छोड़ने पर उसे अधिग्रहण की कीमत का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान वापस किया जाएगा।

डोकोमो ने अप्रैल 2014 में कंपनी से अलग होने का निर्णय किया और 58 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से 7,200 करोड़ रुपये की मांग रखी। लेकिन टाटा समूह ने उसे रिजर्व बैंक के एक नियम का हवाला देते हुए 23.34 रुपये प्रति शेयर की दर से भुगतान की पेशकश की।

आरबीआई के नियम के अनुसार कोई विदेशी कंपनी यदि निवेश से बाहर निकलती है तो उसे शेयर पूंजी पर लाभ के आधार पर तय कीमत से अधिक का भुगतान नहीं किया जा सकता। जापानी कंपनी अंतरराष्ट्रीय पंच निर्णय प्रक्रिया में चली गई और उसके पक्ष में 1.17 अरब डॉलर की डील हुई है. टाटा संस ने कहा है कि वह पंचनिर्णय के अनुपालन का विरोध करेगी क्यों कि वह भारत के स्थानीय कायदे कानूनों से बंधी है।


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