उत्तराखंड में IAS अधिकारी बने 'गुरुजी', क्या अब सुधरेगी शिक्षा

Edited by: Ankur_maurya Updated: 08 Nov 2017 | 05:47 PM
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देवभूमि में ये पहला मौका है जब उत्तराखण्ड के IAS ऑफिसर एक नई भूमिका में उतर आए हैं। IAS अधिकारी गुरुजी बन गए हैं। इस नई भूमिका के तहत एक-दो नहीं बल्कि 23 अफसर अलग अलग स्कूलों में एक शिक्षक की तरह पढ़ाते नजर आए। IAS अधिकारियों की ये पहल काबिले तारीफ है लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि क्या ये मुहिम सूबे कि बदहाल शिक्षा व्यवस्था में सुधार ला पाएगी या फिर ये केवल राज्य स्थापना दिवस पर एक दिन का शो भर बन कर रह जाऐगा।

राज्य स्थापना दिवस के मौके पर सरकार द्वारा आयोजित किये जा रहे कार्यक्रम एक के बाद एक सुर्खियों में आ रहे हैं। पहले रैबार ने सुर्खियां बटोरी वहीं दूसरे दिन IAS अधिकारियों ने शिक्षक की भूमिका में उतरकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। नए मुख्य सचिव उत्पल कुमार के सुझाव और सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर प्रदेश के वरिष्ठ IAS अधिकारी एक दिन के लिये शिक्षक बन गए।

23 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने एक साथ सूबे के 25 अलग अलग सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों की क्लास ली। किसी ने बच्चों को गणित के सवाल पढ़ाये, किसी ने विज्ञान और किसी ने बच्चों को IAS बनने के गुरू दिए वहीं इस दौरान IAS अधिकारियों को बदहाल शिक्षा व्यवस्थाओं से भी रूबरू होना पड़ा। कहीं शिक्षक नहीं थे, कहीं बच्चे टाट बोरों पर बैठकर पढ़ रहे थे। सीएम ने IAS अधिकारियों के इस कदम की तारीफ करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा।

उत्तराखंड में इन 17 सालों में ऐसा कम ही देखने को मिला की एक साथ इतनी बड़ी संख्या में प्रदेश के आईएएस अधिकारियों ने सरकारी स्कूलों की सुध ली हो। मगर जिन सरकारी स्कूलों में IAS अधिकारी पढ़ाने पहुंचे उनकी हालत बेहद पतली है। उत्तराखण्ड की शिक्षा व्यवस्था के हालात को देखें तो आंकड़ों से साफ हो जाते हैं।

खैर IAS अधिकारियों के इस कदम की तारीफ जरूर होनी चाहिए, लेकिन सवाल हैं कि क्या नौकरशाहों की यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी। बहरहाल जिन बच्चों के बीच IAS अधिकारी गुरु जी बनकर पहुंचे वो खुश हैं वहीं विपक्ष ने भी इस पहल की तारीफ की है।