ISRO ने लॉन्च किया भारत का 100वां सेटेलाइट

Edited by: Web_team Updated: 12 Jan 2018 | 12:29 AM
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चेन्नई। अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने इतिहास रच दिया है। शुक्रवार को इसरो का सैटेलाइट 100वां सेटेलाइट लॉन्च हो गया। इसरो ने शुक्रवार सुबह 9.28 पर पीएसएलवी के जरिए एक साथ 31 उपग्रह को लॉन्च किया। बता दें कि भेजे गए कुल 31 उपग्रहों में से 3 भारतीय हैं और 28 छह देशों कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका से हैं।

पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है। इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं। कुल 28 अंतरराष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन ने अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर इस 100वें उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए। इसरो ने अपने इस 42वें मिशन के लिए भरोसेमंद कार्योपयोगी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यानी PSLV-C40 को भेजा। कार्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह और 30 सह-यात्रियों यानी कुल करीब 613 किलोग्राम वजन के साथ उड़ान भरी।

इस मिशन के समय पर मुहर लगाए जाने के बाद इसरो ने कहाथा"PSLV-C40/ कार्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह मिशन की 28 घंटे की उलटी गिनती आज सुबह पांच बजकर 29 मिनट (भारतीय समयानुसार) पर शुरू हो गई।" ये समय मिशन तैयारी समीक्षा समिति और प्रक्षेपण प्राधिकरण बोर्ड द्वारा तय की गई है।

इसरो ने बताया कि वैज्ञानिक फिलहाल उड़ान के विभिन्न चरणों के लिए प्रोपलेंट भराव के कार्य में लगे हुए हैं। इस अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से इस 44.4 मीटर लंबे रॉकेट को प्रक्षेपित किया जाएगा। साथ ही सहयात्री उपग्रहों में भारत का एक माइक्रो और एक नैनो और 28 विदेशी उपग्रह शामिल हैं। इन विदेशी उपग्रहों में कनाडा, फिनलैंड, कोरिया, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के 25 नैनो और 3 माइक्रो उपग्रह शामिल हैं। इन सभी उपग्रहों का वजन 1323 किलोग्राम है।

आपको कार्टोसेट-2 के खासियत के बारे में भी बता दें कि कार्टोसेट-2 में मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरे लगे हुए हैं, जिससे ये उच्च कोटि की तस्वीरें भेजेगा। इसका मुख्य मकसद उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें भेजना है। इसका इस्तेमाल नक्शे बनाने में किया जाएगा। साथ ही इससे तटवर्ती इलाकों, शहरी-ग्रामीण क्षेत्र, सड़कों और जल वितरण आदि की निगरानी की जा सकेगी।