जरुरत पड़ी तो दोबारा करेंगे सर्जिकल स्ट्राइकः सेना

Edited by: Editor Updated: 15 Oct 2016 | 09:46 AM
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नई दिल्ली। रक्षा मामलों की संसदीय कमेटी से सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ी जानकारियों को साझा किया। सेना ने कमेटी के सदस्यों को बताया कि भारतीय फौज ने किस तरह LOC पार करके सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। सेना ने सांसदों से ये भी कहा कि अगर हालात नहीं बदले तो सर्जिकल स्ट्राइक दोबारा भी किया जा सकता है। सर्जिकल स्ट्राइक के 'सबूतों' को लेकर हो रही राजनीति के बीच इस घटनाक्रम को बेहद अहम माना जा रहा है।

ये पहला मौका है, जब सांसदों को सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी दी गई है। इसके पहले भारतीय DGMO ने एक प्रेस कांफ्रेस करके पहली बार इस जवाबी हमले की सार्वजनिक घोषणा की थी। जिसके बाद केंद्र सरकार ने सर्वदलीय मीटिंग के जरिए विभिन्न दलों को इस बारे में बताया था।

आर्मी के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत ने संसदीय कमेटी को बताया कि कमांडो ऐक्शन के पहले इस बात की जानकारी मिली थी कि एलओसी के पार बने लॉन्च पैड्स पर आतंकवादी मौजूद हैं। उनका मकसद जम्मू-कश्मीर में कई लक्ष्यों को निशाना बनाना था। विपिन रावत ने आगे कहा कि भले ही भारत ने कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी DGMO को जानकारी दी हो, लेकिन भविष्य के हालात पर बहुत कुछ निर्भर करेगा।

अगर पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए न होने देने का वादा पूरा नहीं करता तो ऐसे कदम दोबारा उठाए जा सकते हैं। विपिन रावत ने कहा कि सेना का मिशन आत्मरक्षा के लिए था। सेना को इस बात के पक्के सबूत मिले थे कि आतंकी विभिन्न जगहों से भारत में घुसपैठ करने वाले हैं, और बड़ा नुकसान पहुंचाने की फिराक में हैं।

कमेटी के सदस्यों को बताया गया कि इस साल हुए पठानकोट हमले के बाद से ही सैन्य कार्रवाई के विकल्प के बारे में विचार किया जा रहा था। लेकिन उड़ी के हमले ने सेना को इस विकल्प का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर कर दिया। हम आपको ये बता देना चाहते हैं कि अगर हालात नहीं बदले तो सर्जिकल स्ट्राइक दोबारा भी किया जा सकता है।