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अलग राज्य होता तो नहीं बदहाल रहता बुंदेलखंड

Edited By: Shiwani Singh
Updated On : 2017-03-15 07:46:47
अलग राज्य होता तो नहीं बदहाल रहता बुंदेलखंड
अलग राज्य होता तो नहीं बदहाल रहता बुंदेलखंड

नई दिल्ली। यूपी और एमपी के जिलों को मिलाकर एक अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की अक्सर मांगी की जाती रही है। मप्र की पूर्व सीएम उमा भारती ने आश्वासन दिया था, लेकिन पृथक बुंदेलखंड राज्य तो नहीं बन सका।

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वर्तमान में एक नया आंदोलन छिड़ गया है, जिसमें उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश की राज्य सरकारों से बुंदेलखंड के प्रत्येक उपभोक्ता के खातों में पौने दो लाख रुपए जमा कराने की मांग को लेकर व्यापक पैमाने पर अभियान छेड़ा गया है। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भानू सहाय इस समय मप्र के हिस्से वाले बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों के भ्रमण पर हैं। यहां पहुंचकर लोगों से हस्ताक्षर करा रहे हैं।

भानू सहाय का यह आंदोलन इस बात को लेकर चल रहा है कि भारत सरकार द्वारा 2010 से संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र को 500 मेगावाट बिजली मुफ्त में दी थी। इनका आरोप है कि उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश की राज्य सरकारें बुंदेलखंडवासियों की मुफ्त बिजली उन्हीं को बेचकर उनके हक पर खुलेआम डाका डालती रही हैं।

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बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के रघुराम शर्मा बताते हैं कि उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश के संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र में 2004 से 2009 तक भीषण सूखे की स्थिति बनी थी। उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की केंद्र सरकार ने 7466 करोड़ रुपए का सूखा राहत पैकेज व 500 मेगावाट बिजली मुफ्त में दी थी, जो वर्तमान में भी प्राप्त हो रही है।

बुनिमो के सदस्य गिरजा शंकर राय ने बताया कि 1 मई से 2010 से वर्तमान तक केंद्र सरकार से उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र झांसी, ललितपुर बांदा, जालौन, हमीरपुर, महोबा व चित्रकूट को 300 मेगावाट बिजली मुफ्त में दी जा रही है।

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इसी तरह मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह व दतिया को 200 मेगावाट विद्युत मुफ्त में मिल रही है। बुंदेलखंड को मिल रही नि:शुल्क बिजली यहीं के उपभोक्ताओं को बेंचकर दोनों राज्य सरकारों ने लगभग 20 हजार करोड़ रुपए डकार लिए हैं।

बुनिमो के अध्यक्ष भानू सहाय की मांग है कि बिजली बिल के माध्यम से वर्ष 2010 से अवैध रूप से बुंदेलखंडवासियों से वसूला जा रहा औसतन पौने दो लाख रुपए प्रति विद्युत उपभोक्ता बिल अनुसार राशि घट-बढ़ सकती है। यह राशि शीघ्र उपभोक्ता के बैंक खाते में जमा कराई जाए।

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वहीं, इस मांग को लेकर आंदोलन प्रखर किया जा रहा है। सहाय का कहना है कि यदि बुंदेलखंड राज्य बन गया होता तो जो, बिजली केंद्र सरकार ने मुफ्त में दी है उसका सीधा लाभ यहां के प्रत्येक विद्युत उपभोक्ता को मिल रहा होता।


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