मसूद अजहर पर प्रतिबंध न लगाने पर भारत ने सुरक्षा परिषद को लताड़ा

Edited by: Editor Updated: 08 Nov 2016 | 01:59 PM
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नई दिल्ली। भारत ने अपने ही हाथों आतंकवादी संगठन घोषित किए गए समूहों के नेताओं को प्रतिबंधित करने में महीनों लगाने पर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तीखी आलोचना की है।

भारत का यह कड़ा ऐतराज पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया पर प्रतिबंध लगाने की उसकी कोशिश को ‘तकनीकी आधार पर’ खटाई में डालने के बाद सामने आया है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने सोमवार को अपने वक्तव्य में इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद को खरी-खरी सुनाई।

अकबरुद्दीन ने आतंकवादी संगठनों के नेताओं पर प्रतिबंध लगाने में विफलता पर लताड़ते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद अपने ही 'समय के जाल और सियासत' में फंस गई है।

अकबरुद्दीन ने सुरक्षा परिषद के समतामूलक प्रतिनिधित्व और सदस्यता में वृद्धि पर आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा, 'जहां हर दिन इस या उस क्षेत्र में आतंकवादी हमारी सामूहिक अंतरात्मा आहत करते हैं, सुरक्षा परिषद ने इसपर विचार करने में नौ माह लगाए कि क्या अपने ही हाथों आतंकवादी इकाई करार दिए गए संगठनों के नेताओं पर प्रतिबंध लगाया जाए या नहीं।

गौरतलब है कि इससे पहले, इसी साल चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अजहर को आतंकवादी ठहराने के भारत के कदम पर 'तकनीकी स्थगन' लगा दिया था। तकनीकी स्थगन की छह माह की मुद्दत देर सितंबर में खत्म हो गई थी और चीन ने तीन माह का एक दूसरा स्थगन चाहा था।