खतरे में भारत, चीन बना रहा है ब्रह्मपुत्र पर बांध

Edited by: Priyanka Updated: 16 Dec 2017 | 07:02 PM
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नई दिल्ली। डोकलाम के बाद एक बार फिर चीन की एक नापाक हरकत सामने आई है। चीन ने प्रांत से बहने वाली शियांग नदी (ब्रह्मपुत्र) पर एक बड़ा बांध बनाना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं उस बांध का ज्यादातर हिस्सा बनकर तैयार भी हो गया है।

बता दें कि ये खुलासा सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों से हुआ है, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि चीन ने ब्रह्मपुत्र पर एक विशालकाय बांध को बनाया है। देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक पहले ही अंदेशा जता चुके थे कि बरसात के दिनों में चीन डोकलाम का बदला वाटर बम के जरिए ले सकता है।

वाडिया के वैज्ञानिक संतोष राय का कहना है कि सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि चीन ने जानबूझकर संयुक्त राष्ट्र की जलसंधि को दरकिनार कर ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना दिया है।

संतोष राय का कहना है कि अगर चीन इस बांध को बनाकर सिर्फ बिजली उत्पादन करता है उससे किसी को कोई खतरा नहीं है, लिहाजा वो ऐसा करने के बाद पानी का डिस्चार्ज करता रहे, लेकिन चीन ना केवल वहां पर बांध बना रहा है बल्कि ब्रह्मपुत्र नदी का प्रभाव भी अपने सूखा ग्रस्त क्षेत्रों की तरफ डायवर्ट कर रहा है।

वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर जल्द ही चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बनाया गया तो चीन बांध बनाकर भारत के 1 बड़े हिस्से को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। ब्रह्मपुत्र का पानी भारत के कई हिस्सों में सिंचाई के साथ ही दूसरे चीजों में भी काम आता है। ऐसे में अगर गर्मी के समय में चीन इस नदी का पानी रोक कर अपने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भेजता है तो इसका सीधा प्रभाव उन राज्यों पर पड़ेगा, जहां खेती बाड़ी इस नदी के सहारे ही चल रही है।

वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि बांध बनने के दौरान जितना भी मैटीरियल लगाया जा रहा है, चीन वो सारा वेस्ट सामान भी ब्रह्मपुत्र के सहारे भारत की ओर बहा रहा है। एक जांच में ये बात सामने आई है कि ब्रह्मपुत्र का पानी धीरे-धीरे विषैला होता जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट संबंधित जांच एजेंसियों ने केंद्र सरकार को भी सौंपी हैं।

वाडिया के वैज्ञानिकों का मानना है कि वैसे तो पानी में कोई पदार्थ मिलाकर चीन इतना घृणित काम नहीं करेगा। उनका कहना है कि अगर चीन ने पानी एक साथ रोका और बरसात के दिनों में जब नदी में पानी अधिक हो जाएगा तो चीन एक साथ कई हजार क्यूसेक पानी भी छोड़ेगा जिसके बाद कई शहर खतरे की जद में आ जाएंगे।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलसंधि के तहत कोई भी देश किसी भी नदी का पानी नहीं रोक सकता। अगर ऐसा कोई भी करता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस देश की छवि धूमिल होती है। चीन की ये हरकत बेहद गंभीर है लिहाजा केंद्र सरकार को चाहिए कि तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को रखें और जल्द से जल्द इस हालात का कोई निर्णय निकालें।