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कांग्रेस के घर में किच-किच, क्या ‘एकला चलो’ की नीति पर आगे बढ़ रहे हैं किशोर उपाध्याय ?

Edited By: Ankur Maurya
Updated On : 2017-11-02 12:52:16
कांग्रेस के घर में किच-किच, क्या ‘एकला चलो’ की नीति पर आगे बढ़ रहे हैं किशोर उपाध्याय ?
कांग्रेस के घर में किच-किच, क्या ‘एकला चलो’ की नीति पर आगे बढ़ रहे हैं किशोर उपाध्याय ?

देवभूमि उत्तराखंड में कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है इस सवाल ने तब जन्म लिया जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड विमर्श कार्यक्रम का आयोजन कराया वैसे तो किशोर उपाध्याय कह रहे हैं कि इस कार्यक्रम में उत्तराखंड पर चर्चा की गई।

भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की गई लेकिन जब उनकी ही पार्टी के दिग्गजों से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना है की उन्हें इस कार्यक्रम का पता ही नहीं ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सिर्फ राज्य स्थापना से पहले अपने आपको राज्य का हितैशी दिखाने की होड़ है या फिर किशोर उपाध्याय ‘एकला चलो’ की नीति पर आगे बढ़ रहे हैं।

नबंवर में उत्तराखंड राज्य को बने 17 साल पूरे होने जा रहे हैं और इन 17 सालों के लिए सरकार से लेकर विपक्ष तक तैयारी कर रहा है। वहीं पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी उत्तराखंड विमर्श कार्यक्रम का आयोजन कर सभी राजनैतिक दलों को आमंत्रित किया।

उपाध्याय के इस कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ने के साथ ही अन्य राजनैतिक दलों के नेताओं ने शिरकत की ओर अपने विचार रखे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह नदारद दिखे। पार्टी के शीर्ष नेताओं के बयान आने के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी अपना जबाव दिया और कहा कि उत्तराखंड के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। वहीं इशारों ही इशारों में उपाध्याय ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वो उत्तराखंड के लिए आवाज उठा रहे हैं।

पिछले 17 सालों में राज्य में कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी की सरकार रही लेकिन तब किसी ने उत्तराखंड के जख्म को भरने की कोशिश नहीं की। यही वजह है कि नेता तो मालामाल हो गए लेकिन उत्तराखंड कंगाल हो गया।


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