मुस्लिम ग्राहकों से ब्याज नहीं लेता ये बैंक

Edited by: Ankur_maurya Updated: 13 Nov 2017 | 03:23 PM
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नई दिल्ली। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस्लामिक बैंक खोलने से इंकार कर दिया है। RBI के मुताबिक इस्लामिक बैंक लाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने का फैसला हुआ है। सभी नागरिकों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाएं विस्तृत और समान रूप से उपलब्ध हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

आइए हम आपको बतातें है कि क्या है इस्लामिक बैंक और ये कैसे काम करता है:-

1. यह बैंक शरिया के सिद्धांतों पर काम करता है इसलिए इस बैंकिंग को इस्लामिक बैंकिंग कहते हैं। मलेशिया से शुरू हुई इस बैंकिंग की खास बात ये है कि इनमें ग्राहकों से किसी तरह का ब्याज नहीं लिया जाता है और ना ही ब्याज दिया जाता है।

2. इस बैंक की ओर से ब्याज ना लेने की वजह ये है कि इस्लाम में ब्याज लेना हराम माना जाता है। इस्लामी बैंकिंग का कॉन्सेप्ट इस्लाम के बुनियादी उसूल इंसाफ और सामाजिक न्याय पर आधारित है।

3. इस्लामिक बैंकिंग में बैंक एक ट्रस्ट का काम करता है। इसमें सेविंग्स बैंक अकाउंट पर ब्याज नहीं दिया जाता लेकिन जब आपके अकाउंट में पड़े पैसे के इस्तेमाल से फायदा होता है तो आपको उपहारों के रूप में बैंक कुछ ना कुछ देता है।

4. वहीं अगर कोई कर्ज लेता है तो उसे सिर्फ मूल रकम ही जमा करनी होती है और बैंक कोई ब्याज नहीं वसूलता है। जबकि साधारण बैंकों में मोटा ब्याज लिया जाता है और किश्त ना देने पर ब्याज बढ़ा भी दिया जाता है।

5. आपको बता दें कि दुनिया में ऐसे बैंक करीब 50 देश हैं और यहां लगभग 300 से अधिक संस्थाएं ऐसी बैंकिग का काम करती है। इस्लामिक बैंक के कर्ज की खास बात यह है कि यदि आप समय से अपनी पूरी EMI का भुगतान कर देतें हैं तो बैंक आपको अपने मुनाफे से कुछ राशि निकालकर बतौर इनाम दे देगा।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अप्रैल में UAE दौरे के दौरान भारत के एक्सिम बैंक ने आईडीबी के साथ MOU पर हस्ताक्षर किये थे, जिसके बाद से कहा जा रहा था कि जेद्दा (सऊदी अरब) का इस्लामिक डिवेलपमेंट बैंक (IDB) भारत में गुजरात में अपनी पहली भारतीय ब्रांच खोलेगा।