ब्रिक्स समिट: जैश व लश्कर को आतंकी घोषित करने पर नहीं बन सकी एक राय

Edited by: Editor Updated: 17 Oct 2016 | 10:43 AM
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गोवा। ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी ने आतंकवाद के मसले को बड़े जोर शोर उठाते हुए पाकिस्तान को आतंकवाद की जन्मभूमि बताया। मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में आए देशों से आह्वान किया गया कि वह सुनिश्चित करें की उनके क्षेत्र का आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। लेकिन पीएम मोदी आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को जिस तरह घेरना चाह रहे थे, अपने उस रणनीति में कामयाब नहीं हो पाए। एक बार फिर चीन भारत की राह में रोड़ा बना।

चीन की मौजूदगी में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा कमजोर तो होना ही था, लेकिन भारत को उम्मीद थी कि भारत में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आंतकी संगठनों का जिक्र किया जाएगा। समिट सेक्रटरी और इंडिया ब्रिक्स टीम की अगुवाई कर रहे अमर सिन्हा ने बताया कि घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों के बीच इन आतंकी संगठनों के जिक्र को लेकर आम सहमति नहीं बन सकी।

ब्रिक्स सम्मेलन के अंत में जारी घोषणा पत्र में कहा गया, 'हम हाल में भारत समेत कुछ ब्रिक्स देशों में हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं। हम हर तरह के आंतकवाद का पुरजोर विरोध करते हैं और सैद्धांतिक, धार्मिक, राजनीतिक, नस्लीय और किसी भी अन्य वजहों से की गई किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधियों को उचित नहीं ठहरा सकते।

हमने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से मुकाबले के लिए द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है।'गोवा घोषणा पत्र में आतंकवाद शब्द का 38 बार जिक्र हुआ।

गौरतलब है कि भारत को उम्मीद थी कि देश में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों का जिक्र इस सम्मेलन में किया जाएगा साथ ही सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया जाएगा। लेकिन चीन की मौजूदगी में ये मुमकिन नहीं हो सका।