जानें क्या होती है शरिया बैंकिंग

Edited by: Web_team Updated: 13 Nov 2017 | 06:46 PM
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नई दिल्ली। राईट टू इन्फॉरमेशन (RTI) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में जानकारी दी है कि केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में शरीया के सिद्धांतों पर चलने, बैंकिंग व्यवस्था शुरू करने के प्रस्ताव पर आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है। RBI ने कहा है कि ये निर्णय सभी लोगों के सामने बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं के समान अवसर पर विचार किए जाने के बाद लिया गया है।

क्या है इस्लामिक बैंकिंग
इस्लामिक बैंकिंग में बैंक पैसे के ट्रस्ट्री की भूमिका में होता है और बैंक में जो लोग पैसे जमा करवाते है, वो जब मर्जी यहां से पैसा निकाल सकते हैं। वहीं, एक बात ये भी है कि इस बैकिंग प्रणाली में सेविंग्स बैंक अकाउंट पर ब्याज नहीं दिया जाता है, यानी आपके जमा के पैसे पर बैंक आपको ब्याज नहीं देगा। इस्लामिक कानून में लोन देने और लोन लेने वाले दोनों ही पार्टियों पर समान रिस्क होता है और अगर पैसा डूब जाता है तो इसकी जिम्मेदारी दोनों पर मानी जाती है। इसके अलावा इस्लामिक बैंकिंग में शराब, जुआ जैसे गलत समझे जाने वाले धंधों में निवेश करने की इजाज़त नहीं है।