देश के 13वें उपराष्ट्रपति बने नायडू, ली पद एवं गोपनीयता की शपथ

Edited by: Shiwani_Singh Updated: 11 Aug 2017 | 10:34 AM
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नई दिल्ली। वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति पद के लिए शपथ ले ली है। नवनिर्वाचीत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। ये शपथ ग्रहण कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में हुआ। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत सभी बड़े नेता मौजूद थे।वहीं, शपथ ग्रहण से पहले नायडू आज सवेरे सबसे पहले राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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शपथ ग्रहण करने के बाद अब वह संसद भवन आएंगे और संसदीय कार्यमंत्री और राज्यमंत्री उनका स्वागत करेंगे। वेंकैया नायडू यहां पर भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। 11 बजे वह सदन में प्रवेश कर जाएंगे। वहीं हामिद अंसारी ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन मुस्लिमों की बेचैनी की बात की थी। इसके जवाब में उप-राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले वेंकैया नायडू ने बिना नाम लिए अंसारी के बयान पर निशाना साधा।

उन्‍होंने देश में अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना होने की बात को महज ‘राजनीतिक प्रचार’ बताकर खारिज कर दिया। वेंकैया नायडू ने यद्यपि किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को पूर्व उप-राष्ट्रपति अंसारी के एक टीवी साक्षात्कार की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के मुसलमानों में असहजता और असुरक्षा की भावना है, और ‘स्वीकार्यता का माहौल’ खतरे में है।

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नायडू ने कहा, ‘कुछ लोग कह रहे हैं कि अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। यह एक राजनीतिक प्रचार है। पूरी दुनिया के मुकाबले अल्पसंख्यक भारत में ज्यादा सकुशल और सुरक्षित हैं और उन्हें उनका हक मिलता है।’ उन्होंने इस बात से भी इत्तेफाक नहीं जताया कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और कहा कि भारतीय समाज अपने लोगों और सभ्यता की वजह से दुनिया में सबसे सहिष्णु है। उन्होंने कहा कि यहां सहिष्णुता है और यही वजह है कि लोकतंत्र यहां इतना सफल है।

कौन हैं वेंकैया नायडू
वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई, 1949 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ। नेल्लोर से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं से राजनीति में स्नातक किया। विशाखापट्टनम के लॉ कॉलेज से अंतरराष्ट्रीय कानून में डिग्री ली। कॉलेज के दौरान ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए। नायडू पहली बार 1972 में जय आंध्रा आंदोलन से सुर्खियों में आए।

1975 में इमरजेंसी में जेल भी गए थे। 1977 से 1980 तक यूथ विंग के अध्यक्ष रहे। महज 29 साल की उम्र में 1978 में पहली बार विधायक बने। 1983 में भी विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे राज्य में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे। बीजेपी के विभिन्न पदों पर रहने के बाद नायडू पहली बार कर्नाटक से राज्यसभा के लिए 1998 में चुने गए। इसके बाद से ही 2004, 2010 और 2016 में वह राज्यसभा के सांसद बने।