दाल-चावल नहीं, रीता खाती है लोहा, कांच और प्लास्टिक

Edited by: Editor Updated: 08 Nov 2016 | 07:10 PM
detail image

नई दिल्ली। बचपन में मां के मरने के बाद और गरीबी झेल रहे पिता द्वारा भरपेट खाना न दे पाने से 8 साल की रीता ने कांच, लोहा,प्लस्टिक जैसी चीजो को अपने खाने का हिस्सा बना लिया है। कहते हैं कि इंसान को गरीबी क्या कुछ सिखा देती है यह इस कहानी से सब बयां हो जाती है।

यह कहानी उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के चकलवंसी गांव की है। चकलवंसी गांव के मजरे में रहने वाली रीता भले ही 8 साल की हो गई है, लेकिन रीता की अनोखी आदत यानी लोहा, कांच, प्लास्टिक उसके खाने का हिस्सा बन चुकी है। हालांकि यह रीता का शौक नहीं, बल्कि यह उसकी मजबूरी है, जो आदत में बदल गई है।

रीता की दादी छेदाना के मुताबिक मां के मरने के बाद रीता का पूरी तरह ख्याल न रख पाने का मलाल उसके मन में भी है और वो इस बात को मानती हैं कि आज जो रीता की आदत बन चुकी है उसके लिए उसकी देखभाल में कमी एक बड़ी वजह है।

वहीं, पड़ोसी सुरेन्द्र ने बताया कि जहां पिता रोजी-रोटी की आस में घर से बाहर घूमता रहता था, तो रीता भूख मिटाने के लिए लोहा, ब्लेड और प्लास्टिक के कैसेट खाकर अपना गुजारा करती थी।