उत्तर प्रदेश में एक होगी अल्लाह की जायदाद !

Edited by: Ankur_maurya Updated: 23 Oct 2017 | 09:54 PM
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तय किया है कि यूपी में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड भंग करके एक कर दिया जाए। इससे पहले जब सरकार ने इन बोर्डों की जांच कराई थी तब पता चला था कि धर्म की आड़ में वक्फ बोर्ड में जमकर भ्रष्टाचार हुआ था। जिस पर योगी सरकार ने कार्रवाई का विचार किया, लेकिन ये बात धर्म के सियासी झंडाबरदारों के गले नहीं उतरी। कहा गया शर्म आती है, सवाल ये है कि जब ये घोटाले होते रहे तो शर्म क्यों नहीं आई और भ्रष्टाचार को रोकने की नीति पर शर्म क्यों ?

वक्फ यानि अल्लाह की जायदाद को धर्म के ठेकेदारों ने जमकर लूटा। बंदगी के नाम पर अल्लाह के बंदों को खांचों में बांटे रखा ताकि इसकी आड़ में छिपकर अपनी हवेलियां तामील होती रहे, लेकिन ये गुजरे दिनों के बात है। यूपी की योगी सरकार ने तय किया है कि बेवजह शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई औचित्य नहीं है। लिहाजा इनका विलय किया जाए।

दरअसल सूबे के मुखिया सीएम योगी यूपी को नई पहचान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा यूपी जहां भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं होगी। ऐसा यूपी जहां पूरा तंत्र पारदर्शी होगा। भ्रष्टाचार पर सरकार का वार इस्लाम के झंडाबरदारों का कहां रास आने वाला था। खोल दिया मोर्चा कहने लगे मुझे तो शर्म आ रही है कि कोई वजीर ऐसी बात कर रहा है। भला ये भी कोई बात है अलग अलग बोर्डों से किसी को क्या परहेज हो सकता है।

विलय की योजना एक दिन में नहीं बनी बल्कि एक लंबी प्रक्रिया के बाद सरकार ने इस पर विचार किया। दरअसल केन्द्री य वक्फक परिषद ने उत्तिर प्रदेश के शिया तथा सुन्नी वक्फा बोर्ड में अनियमितताओं की शिकायत पर जांच करायी थी। मार्च 2017 में आयी जांच रिपोर्ट में तमाम शिकायतों को सही पाया गया था।

वक्फक राज्योमंत्री रजा ने शिया और सुन्नी बोर्ड को लेकर अलग-अलग तैयार की गयी रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपी थी। तभी से ये माने जाने लगा था कि न खाउंगा न खाने दूंगा की नीति पर चल रही सरकार धर्म की आड़ में चल रहे घोर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करने वाली।