आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में व्यस्त हैं पार्टियां, अधर में लटका देश का भविष्य!

Edited by: Priyanka Updated: 09 Feb 2018 | 03:22 PM
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नई दिल्ली। देश की दो बड़ी पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी आजकल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में वयस्त हैं। वहीं, साल 2019 में आने वाले आम लोकसभा चुनावों के चलते भी इन पार्टियों के बीच अभी से युद्ध संग्राम मचा हुआ है। हाल में ही लोकसभा में राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव के बाद पीएम मोदी ने कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद रेणुका चौधरी की ठहाकों वाली हंसी पर तीखी टिप्पणी की थी तो दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री किरण रिजूजू ने अपने ट्विटर अकाउंट पर रेणुका की तुलना रामायण के किरदार 'शूर्पणखा' तक से कर डाली।

बीजेपी की ओर से किसी महिला सांसद के प्रति ऐसी तीखी टिप्पणी किए जाने पर अब सड़क से लेकर संसद तक सियासत गरमा गई है। एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम और केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा रेणुका चौधरी पर दिए गए बयानों की कड़ी निंदा की है तो वहीं उन्होंने राफेल डील को लेकर बीजेपी और पीएम मोदी पर सीधे तौर पर घोटाला किए जाने का आरोप भी लगाया है।

असल में राफेल विमान सौदे पर कांग्रेस का कहना है कि सरकार जिस तरह से विमानों की कीमतों पर चुप्पी साधे हुए है, उससे संदेह गहरा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सौदे में घोटाले की आशंका जताते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही राहुल ने आज इस मसले पर लोकसभा में बोलने के लिए स्पीकर सुमित्रा महाजन को लिखित नोटिस भी दिया है।

इस ख़बर के इतर, कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के विवादित फेसबुक पोस्ट पर उनके खिलाफ राज्यसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा है। इन दोनों बातों से ये साफ पता लगता है कि कांग्रेस अब केंद्र सरकार के खिलाफ हमलावर है।

वहीं, आरोप-प्रत्यारोप की इस राजनीति के बीच 2019 में आने वाले आम चुनाव को देखते हुए और कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों से बचने के लिए दिल्ली में आज बीजेपी ने अपने संसदीय दल की बैठक की, जिसमें बीजेपी के कई बड़े नेताओं के आलावा पीएम मोदी ने भी हिस्सा लिया। इस बैठक में कांग्रेस के आरोपों से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई।

बता दें अपने संसदीय दल की बैठक में राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के जवाब पर कांग्रेस द्वारा किए गए हमले की बीजेपी ने निंदा की। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, "जिस ढंग से कांग्रेस द्वारा लोकसभा मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर कांग्रेस द्वारा हल्ला और टोकाटाकी की गई वो रवैया ठीक नहीं था। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है, हम इसकी निंदा करते हैं।"

साथ ही अमित शाह ने ये भी कहा, "राहुल गांधी जिस तरह की राजनीति की शुरुआत कर रहे हैं, उस तरह की राजनीति हम नहीं कर सकते हैं लेकिन हम उसको रोकेंगे। प्रधानमंत्री के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस के रवैइए को हम जनता के बीच लेकर जाएगें। कांग्रेस की इन बातों को संसद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसे जनता के बीच ले जाना जाहिए।"

इस बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने पत्रकारों को ये जानकारी दी कि शाह ने भी राहुल पर आरोप लगाए हैं। बीजेपी अध्यक्ष ने राफेल सौदे को लेकर बढ़ते विवाद के बीच आज संसदीय दल की बैठक में कहा कि राहुल की राजनीतिक शैली अलोकतांत्रिक है। इसी वजह से पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान इस तरह की अड़चनें पैदा की गईं।

इसके बाद शाह ने सवाल किया, "राफेल डील के मुख्‍य बिंदु के बारे में जानकारी दी जा चुकी है और आगे भी इसके संबंध में हम बताएंगे, लेकिन हर एक चीज को लेकर चर्चा करना देशहित में कितना उचित होगा?"

हालांकि, इस मुद्दे को लेकर एक दिन पहले ही संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि इस तरह के आरोप लगाकर वो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता कर रहे हैं। जेटली ने राहुल को पूर्व रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी से सीखने की नसीहत भी दी।

इन सब से अलग संसदीय दल की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यमवर्ग और किसानों के मुद्दे पर बातचीत की। मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसदों को अपने टिफिन ब्रेक के दौरान मध्यमवर्ग और किसानों के मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए।

वहीं, बजट सत्र में किसानों के लिए आवंटित किए गए बजट पर बोलते समय भी पीएम मोदी ने कहा था कि सदन में चर्चा के दौरान सांसदों के पास वक्त नहीं होता है, इसलिए इस मुद्दे पर गहनता से टिफिन ब्रेक के दौरान बातचीत की जानी चाहिए। बता दें कि मोदी इससे पहले सांसदों को चाय पर चर्चा करने की बात कह चुके हैं।

गौरतलब है कि संसदीय दल की बैठक खत्म होने के बाद पीएम मोदी तीन देशों की विदेश यात्रा पर रवाना हो गए। अपनी यात्रा के दौरान पीएम फ़िलिस्तीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान के दौरे पर जाएंगे। जहां इन तीन देशों के इस दौरे पर व्यापार, निवेश, सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, ऊर्जा समेत द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया जाएगा।

बहरहाल, इन सभी मुद्दों पर गौर करने के बाद जो बात सामने निकलकर आ रही है वो ये है कि देश के राजनेताओं का अधिकतर समय और ऊर्जा सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करने में व्यर्थ हो रहा है, जिससे देश का भविष्य अधर में लटकता हुआ नजर आ रहा है।