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पिथौरागढ़ के सीमावर्ती इलाके विश्व धरोहर में होंगे शामिल

Edited By: Editor
Updated On : 2016-11-01 03:49:01
पिथौरागढ़ के सीमावर्ती इलाके विश्व धरोहर में होंगे शामिल
पिथौरागढ़ के सीमावर्ती इलाके विश्व धरोहर में होंगे शामिल

उत्तराखंड। भारत, नेपाल और चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ क्षेत्र के दुर्गम गांवों, प्राकृतिक धरोहरों और जैव विविधता के साथ ही उच्च हिमालयी संस्कृति को यूनेस्को विश्व धरोहर बनाने जा रहा है। इन दिनों कैलाश लैंड स्कैप के तहत पिथौरागढ़ के सीमावर्ती इलाके को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की कवायद तेज होने लगी है।

पिछले 4 सालों से कैलाश लैंड स्कैप योजना चलाई जा रही है। भारत, चीन और नेपाल की सरकारें इस योजना में संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं। यूनेस्को, भारतीय वन्यजीव संस्थान और जी बी पंत पर्यावरण संस्थान की पहल पर सीमांत के इलाकों को विश्व धरोहर में शामिल किया जा रहा है।

करीब 4 साल के इस प्रोजेक्ट के तहत चीन और नेपाल से सटे उच्च हिमालयी इलाके का व्यापक अध्ययन भी किया जाना है। कैलास लैंड स्कैप को विश्व धरोहर में शामिल करने से जहां सीमांत के इलाके को एक पहचान मिलेगीय़ वहीं ये इलाका पर्यटन के मानचित्र में भी स्थापित हो सकेगा। यही नहीं ग्रामीणों की आजीविका और प्रकृति के संरक्षण को भी इसमें शामिल किया गया है।

मानसरोवर क्षेत्र के पर्यावरण, बायोडाइवर्सिटी और संस्कृति आदि का संरक्षण इसका प्रमुख एजेंडा है। जानकारों को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से उच्च हिमालयी इलाकों में व्यापक बदलाव आयेगा।


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