दिवाली पर इस जगह नहीं होती मां लक्ष्मी की पूजा, इनकी उपासना का है महत्व

Edited by: Shivani Updated: 19 Oct 2017 | 09:06 AM
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नई दिल्ली। दिवाली के अवसर पर मां लक्ष्मी और गणेश भगवान की अराधना का महत्व है। पूरे देश में दिवाली की शाम को लक्ष्मी और गणेश की मूर्ती की स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक राज्य ऐसा है जहां इनकी पूजा नहीं होती। हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल और बंगाली समुदाय की।

सभी जानते हैं कि पंश्चिम बंगाल में मां काली की विशेष रूप से अराधना होती है। दिवाली के अवसर पर भी यहां मां काली की ही अराधना की जाती है। दिवाली के दिन यानी अमावस्या की अर्धरात्रि में मां की पूजा की जाती है।

अमावस्या में मां दुर्गा का आगमन होता है, जो शारदीय नवरात्र के तौर पर जाना जाता है। बंगाल में 15 दिन बाद दूसरी अमावस्या में मां काली की पूजा करने की प्रथा है। यहां दशमी के छह दिन बाद लक्ष्मी की पूजा की जाती है, लेकिन यह पूजा भारत के बाकी राज्यों जैसी नहीं होती है। यहां सिर्फ मां लक्ष्मी की मूर्ती की स्थापना की जाती है।

बंगाल में मां काली की पूजा विशेष विधि के अनुसार की जाती है। प्रात: काल से ही बंगाल के लोग चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, मां का व्रत रखते हैं और होम-हवन व पुष्पांजलि के साथ मां की अराधना करते हैं। मां को पूजा में 108 गुड़हल के फूल, 108 बेलपत्र एवं माला, 108 मिट्टी के दीपक और 108 दुर्वा चढ़ाते है।

मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक है। मां शक्ति दसमहाविद्याओं के स्वरूपों में विराजमान है। मान्यता है कि मां काली की पूजा-उपासना से भय खत्म हो जाते हैं, साथ ही भक्त रोग मुक्त होते हैं। मां काली अपने भक्तों की रक्षा करके उनके शत्रुओं का नाश करती हैं। इनकी पूजा से तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता है।