प्रद्युम्न की मौत पर प्रसून जोशी ने जताया दुख, शेयर की मार्मिक कविता

Edited by: PoojaDevi Updated: 13 Sep 2017 | 01:37 PM
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मुंबई। रेयान इंटरनेशनल स्कूल के कक्षा दो के छात्र प्रद्युम्न की नृशंस हत्या पर पूरा देश आहत है। इसी के साथ पूरे बॉलीवुड ने भी इस मामले पर दुख जताया है। प्रद्युम्न की मौत के आरोप में बस कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन लोगों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है।

बॉलीवुड अभिनेता और तीन बच्चों के पिता संजय दत्त ने भी प्रद्युम्न की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि ये बेहद डरावना वक्त है। एक पिता के तौर पर वो खुद को लाचार महसूस करते हैं। वहीं, जाने-माने गीतकार और अब सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने सोशल मीडिया पर बचपन पर एक मार्मिक कविता शेयर की है जो काफी वायरल हो रही है। अपनी कविता के ज़रिए प्रसून जोशी ने इंसानियत पर कई सवाल भी खड़े किए हैं।

प्रसून जोशी की कविता

जब बचपन तुम्हारी गोद में आने से कतराने लगे,
जब मां की कोख से झांकती जिंदगी, बाहर आने से घबराने लगे,
समझो कुछ गलत है
जब तलवारें फूलों पर जोर आजमाने लगें,
जब मासूम आंखों में खौफ नजर आने लगे,
समझो कुछ गलत है
जब ओस की बूंदों को हथेलियों पे नहीं,
हथियारों की नोंक पर थमना हो,
जब नन्हें-नन्हें तलुवों को आग से गुजरना हो,
समझो कुछ गलत है
जब किलकारियां सहम जायें
जब तोतली बोलियां खामोश हो जाएं
समझो कुछ गलत है
कुछ नहीं बहुत कुछ गलत है
क्योंकि जोर से बारिश होनी चाहिये थी
पूरी दुनिया में हर जगह टपकने चाहिये थे आंसू
रोना चाहिये था ऊपरवाले को
आसमान से फूट-फूट कर
शर्म से झुकनी चाहिये थीं इंसानी सभ्यता की गर्दनें
शोक नहीं सोच का वक्त है
मातम नहीं सवालों का वक्त है
अगर इसके बाद भी सर उठा कर खड़ा हो सकता है इंसान
तो समझो कुछ गलत है।