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RBI कर सकता है रेपो रेट में कटौती, गवर्नर की अध्यक्षता में बैठक जारी

Edited By: Hindi Khabar
Updated On : 2017-12-06 13:38:34
RBI कर सकता है रेपो रेट में कटौती, गवर्नर की अध्यक्षता में बैठक जारी via
RBI कर सकता है रेपो रेट में कटौती, गवर्नर की अध्यक्षता में बैठक जारी

नई दिल्ली। RBI की मौद्रिक नीति समिति आज बड़ा फैसला ले लकती है। RBI गवर्नर की अध्यक्षता में मंगलवार से शुरू हुई RBI की मौद्रिक नीति समिति की इस बैठक में रेपो रेट घटाया जा सकता है। ऐसा होने पर आम आदमी हो या कारोबारी, सभी को सस्ते कर्ज का तोहफा मिलेगा। वहीं, इस बार भी अगर RBI रेपो रेट में कटौती नहीं करता है, तो आम आदमी को सस्ते कर्ज के लिए फरवरी तक इंतजार करना पड़ सकता है।

हालांकि, फरवरी में भी RBI की मौद्रिक नीति समिति अर्थव्यवस्था की चाल देखकर ही फैसला लेगी। आज RBI के सामने रेपो रेट में कटौती करने के फैसले को लेकर कई चुनौतियां भी हैं।

ब्याज दरें कम करने का दबाव हुआ कम
मौद्रिक नीति समिति की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब GDP के आंकड़ों में सुधार देखने को मिला है। इससे अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार आया है। इस सुधार को देखते हुए RBI पर ब्याज दरें कम करने का दबाव जरूर कम हुआ है। हालांकि, GDP आंकड़ों के अलावा बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की लगातार बढ़ रही कीमतों की चुनौती भी उसके सामने रहेगी।

महंगाई में बढ़ोत्तरी
थोक महंगाई दर और खुदरा महंगाई दर में इजाफा हुआ है। नवंबर में जारी किए गए अक्टूबर की थोक महंगाई दर के आंकड़ों को देखें तो ये बढ़कर 3.56 फीसदी के स्‍तर पर आ गई है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर भी 3.58 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच गई है। महंगाई बढ़ने के लिए खाद्य उत्पादों की लगातार बढ़ रही कीमतें हैं। इस बैठक में RBI के पास बढ़ती महंगाई एक बड़ी चुनौती रहेगी।

तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। मौजूदा समय में कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। इस वजह से ब्याज दरें घटाने और बढ़ाने को लेकर फैसला लेते वक्त RBI की समिति इस पर भी विचार करेगी। समिति के फैसले को धार देने में ये फैक्टर भी अहम भूमिका निभाएगा।

GDP का ये मिल सकता है फायदा
GDP के आंकड़ों में सुधार आने का फायदा ग्रोथ प्रोजेक्शन में सुधार के तौर पर मिल सकता है। GDP में आई तेजी को देखते हुए RBI अर्थव्यवस्था के ग्रोथ अनुमान को बेहतर कर सकता है। पिछले कुछ महीनों के दौरान निजी क्षेत्र का निवेश घटा है। इस पर भी RBI की मौद्रिक समिति विचार-विमर्श करेगी और इसके बाद ही कोई फैसला लेगी।


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