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NSG की सदस्यता पर रूस ने दिया चीन-PAK को झटका, भारत का किया समर्थन

Edited By: Shivani
Updated On : 2017-12-07 15:15:03
NSG की सदस्यता पर रूस ने दिया चीन-PAK को झटका, भारत का किया समर्थन via
NSG की सदस्यता पर रूस ने दिया चीन-PAK को झटका, भारत का किया समर्थन

नई दिल्ली। एनएसजी की सदस्यता पर रूस ने चीन और पाकिस्तान को जोर का झटका दिया है तो वही भारत के प्रति अपनी पुरानी दोस्ती को एक बार फिर से साबित किया है। रूस ने कहा है कि एनएसजी सदस्यता के लिए भारत और पाकिस्तान की दावेदारी को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। बता दें कि चीन लगातार न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है।

एनएसजी ग्रुप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु व्यापार को नियंत्रित करती है। भारत अपनी दावेदारी के मुकाबले चीन के इस विरोध को पाकिस्तान के पक्ष में मानता है। बुधवार को जब रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने विदेश सचिव एस. जयशंकर से मुलाकात की। विदेश सचिव एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद रयाबकोव ने कहा, 'एनएसजी सदस्यता की दावेदारी के लिए पाकिस्तान के आवेदन पर कोई सर्वसम्मति नहीं है और इसे भारत की दावेदारी के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।

पहली बार है जब रूस के किसी सीनियर डिप्लोमेट ने सार्वजनिक रूप से दो मामलों को एक साथ जोड़ने पर प्रतिक्रिया दी हो। उन्होंने कहा मुझे मामले की पेचिदगी का आभास हैं, लेकिन हम उन देशों की तरह नहीं जो केवल बात करते हैं। हम इमानदारी से प्रयास कर रहे हैं। हम इस मुद्दे पर चीन के साथ विभिन्न स्तर पर बातचीत कर रहे हैं।

इससे पहले साल की शुरुआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि भारत ने चीन को समझाने के लिए रूस से संपर्क किया है। बता दें कि चीन भारत को मेरिट के आधार पर एनएसजी की सदस्यता देने का विरोध कर रहा है।

हालांकि रूस का मानना है कि सभी देशों को इस बारे में सामूहिक प्रयास करना चाहिए तभी जाकर चीन मानने को तैयार होगा। रयाबकोव ने अपने बयान में मुद्दे के राजनीतिकरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों को भारत की सदस्यता के लिए और ज्यादा सकारात्मक प्रयास करने की जरूरत है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया।

रूसी डिप्लोमेट ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा हुं, लेकिन इस्लामाबाद के साथ संबंधों में रूस का कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है। मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि दुनिया में किसी भी देश के साथ रूस का संबंध भारत के साथ रिश्तों की बुनियाद पर नहीं होगा।


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