SC का बड़ा फैसला- 'आपकी प्राइवेसी है आपका मौलिक अधिकार'

Edited by: Shiwani_Singh Updated: 24 Aug 2017 | 09:15 AM
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट राईट टू प्राईवेसी यानी निजता का अधिकार को लेकर आज अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आपकी प्राइवेसी आपका मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि ये संविधान के आर्टिकल 21 (जीने के अधिकार) के तहत आता है। बता दें कि 9 जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले पर अपना फैसला दिया है।

आपको बता दें कि निजता के अधिकार पर नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में 6 दिनों तक रोजाना सुनवाई की थी, जिसके बाद 2 अगस्त को पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस खेहर कर रहे हैं।

केंद्र को झटका

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार को तगड़ा झटका लग सकता है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा था कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है। अब इस फैसले का सीधा असर आधार कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं के अमल पर होगा। लोगों की निजता से जुड़े डेटा पर कानून बनाते वक्त तर्कपूर्ण रोक के मुद्दे पर विचार करना होगा। सरकारी नीतियों पर अब नए सिरे से समीक्षा करनी होगी। यानी आपके निजी डेटा को लिया तो जा सकता है, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

हाालंकि, इस फैसले से आधार की किस्मत नहीं तय होगी। आधार पर अलग से सुनवाई होगी। बेंच को सिर्फ संविधान के तहत राइट टु प्रिवेसी की प्रकृति और दर्जा तय करना था। 5 जजों की बेंच अब आधार मामले में ये देखेगी कि लोगों से लिया गया डेटा प्रिवेसी के दायरे में है या नहीं। अब सरकार के हर कानून को टेस्ट किया जाएगा कि वो तर्कपूर्ण रोक के दायरे में है या नहीं। कुछ जानकारों का मानना है कि इस अधिकार के तहत सरकारी योजनाओं को अब चुनौती दी जा सकती है।

कौन है ये 9 जज

चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम सप्रे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस अब्दुल नजीर