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शरद पूर्णिमा पर अमृत के साथ बरसेगी माता लक्ष्मी की कृपा

Edited By: Editor
Updated On : 2016-10-14 09:48:53
शरद पूर्णिमा पर अमृत के साथ बरसेगी माता लक्ष्मी की कृपा
शरद पूर्णिमा पर अमृत के साथ बरसेगी माता लक्ष्मी की कृपा

नई दिल्ली। शनिवार को शरद पूर्णिमा है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है की शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा सोलह कलाओं से संपन्न होकर अमृत वर्षा करता है इसलिए इस रात में खीर को खुले आसमान में रखा जाता है और सुबह उसे प्रसाद मानकर खाया जाता है। ये भी कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है।

शास्त्रों के मुताबिक इस दिन अगर अनुष्ठान किया जाए तो यह अवश्य सफल होता है। तीसरे पहर इस दिन व्रत कर हाथियों की आरती करने पर उतम फल मिलते है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसी कारण इस दिन खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखकर अगले दिन प्रात:काल में खाने का विधि-विधान है।

इस दिन व्रत रख कर विधिविधान से लक्ष्मीनारायण का पूजन करें और रात में खीर बनाकर उसे रात में आसमान के नीचे रख दें ताकि चंद्रमा की चांदनी का प्रकाश खीर पर पड़े। दूसरे दिन सुबह स्नान करके खीर का भोग अपने घर के मंदिर में लगाएं कम से कम तीन ब्राह्मणों या कन्याओं को खीर प्रसाद के रूप में दें और फिर अपने परिवार में खीर का प्रसाद बांटें। इस प्रसाद को ग्रहण करने से अनेक प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है।


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