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एस.वाई.एल पर घिरी बादल सरकार, ट्विटर पर विपक्ष ने किया वार

Edited By: Editor
Updated On : 2016-11-10 18:38:48
एस.वाई.एल पर घिरी बादल सरकार, ट्विटर पर विपक्ष ने किया वार
एस.वाई.एल पर घिरी बादल सरकार, ट्विटर पर विपक्ष ने किया वार

लुधियाना। पंजाब विधानसभा चुनाव पर एस.वाई.एल. के मुद्दे को लेकर मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। कांग्रेस के विधायकों और कैप्टन अमरेंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने उन पर कटाक्ष किए। वहीं, कांग्रेस ने भी बादल सरकार को घेरा।

शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा पंजाब में एस.वाई.एल. पर दोहरा मानक अपनाया है जो एस.वाई.एल. के खिलाफ था लेकिन हरियाणा के पक्ष में था।

वित्त मंत्री परमिंद्र सिंह ढींढसा का कहना है कि एस.वाई.एल. नहर समस्या केवल अकाली दल के व्याकुल रुख के साथ हल किया जा सकता है।


एक्साइज एंड टैक्सेशन मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरो ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल तथा भाजपा गठबंधन को एकजुट हो इस मामले को हल करने की जरुरत है।

सोहन सिंह ठंडल का कहना है कि बादल सरकार एसवाईएल मामले में मील का पत्थर साबित हुए हैं । 5376 एकड़ जमीन मूल मालिकों को लौटाई गई है।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि एस.वाई.एल. मुद्दे पर हमारा रुख स्पष्ट है कि हम पानी की एक बूंद की किसी को देने की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि यह हमारे किसानों की जीवन रेखा है। मनप्रीत सिंह अयाली एम.एल.ए.का कहना है कि पंजाब एस.वाई.एल. के खिलाफ एकजुट खड़ा है।

राज्सव मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया का कहना है कि मैं जनता को पंजाब सरकार के साथ हाथ मिलाने के लिए न्योता देता हूं। हम मिल कर इस मुद्दे पर लड़ेंगे क्योंकि हमारा पानी अनमोल खजाना है।

विरसा सिंह वल्टोहा का कहना है कि जब हमें खुद पानी की जरुरत है हम कैसे किसी अौर राज्य को पानी भेजे। अकाली दल ने कहा कि एसवाईएल के खिलाफ हम लड़ाई लड़ेंगे। अकाली दल का कहना है कि 1982 में कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने इंदिरा गांधी के साथ मिल कर एस.वाई.एल.नहर का उदघाटन करवाया और वर्तमान समय में भी राजनीति कर रहे हैं।


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