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गौरैया दिवस विशेष: कहीं यादों में न रह जाए गौरैया!

Edited By: Hindi Khabar
Updated On : 2017-03-20 03:44:37
गौरैया दिवस विशेष: कहीं यादों में न रह जाए गौरैया!
गौरैया दिवस विशेष: कहीं यादों में न रह जाए गौरैया!

नई दिल्ली। इंसान के बेहद करीब रहने वाली 'स्पैरो' यानी नन्ही सी गौरैया अब धीरे-धीरे करके कम हो रही है। गौरैया इंसान की सच्ची दोस्त भी है और पर्यावरण संरक्षण में उसकी खास भूमिका भी है और इसी को देखते हुए दुनियाभर में 20 मार्च को गौरैया संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् मो. ई. दिलावर के प्रयासों से 2010 में दुनिया में पहली बार यह दिवस अस्तित्व में आया।

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आंध्र विश्वविद्यालय के एक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि गौरैया की आबादी में 60 फीसदी से अधिक की कमी आई है। ब्रिटेन की 'रायल सोसाइटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ बर्डस' ने इस चुलबुली और चंचल पक्षी को 'रेड लिस्ट' में डाल दिया है। गौरैया पासेराडेई परिवार की सदस्य है, लेकिन इसे वीवरपिंच परिवार का भी सदस्य माना जाता है।

इसकी लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती है। इसका वजन 25 से 35 ग्राम तक होता है। यह अधिकांश झुंड में ही रहती है। यह अधिकतम दो मील की दूरी तय करती है। इसका जीवन काल दो साल का होता है और यह पांच से छह अंडे देती है।

कहा जाता है कि मानव जहां-जहां गया गौरैया उसका हम सफर बन कर उसके साथ गई। शहरी हिस्सों में इसकी छह प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसमें हाउस स्पैरो, स्पेनिश, सिंउ स्पैरो, रसेट, डेड और टी स्पैरो शामिल हैं। यह यूरोप, एशिया के साथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के अधिकतर हिस्सों में मिलती है। इसकी प्राकृतिक खूबी है कि यह इंसान की सबसे करीबी दोस्त है।

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दरअसल, गौरैया की घटती आबादी के पीछे मानव विकास सबसे अधिक जिम्मेदार है। बढ़ती आबादी के कारण जंगलों का सफाया हो रहा है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में बाग-बगीचे खत्म हो रहे हैं, जिसका सीधा असर इन पर दिख रहा है। शहरों में गगनचुंबी इमारतें और संचार क्रांति इनके लिए अभिशाप बन गई है। शहर से लेकर गांवों तक मोबाइल टावर और उससे निकलते रेडिएशन से इनकी जिंदगी संकट में फंस गई है। देश में बढ़ते औद्योगिक विकास ने इनके जीवन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

ऐसे में समय रहते इन विलुप्त होती प्रजाति पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब गौरैया केवल इतिहास बनकर रह जाएगी और फिर केवल गूगल पर ही दिखाई देगी। ऐसे में हमें इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।