सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों पर SC सख्त

Edited by: Aniket Updated: 15 Dec 2017 | 06:06 AM
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित होने वाली 12 विशेष अदालतों को अगले साल एक मार्च से काम शुरू करने का आदेश दे दिया है।

शीर्ष अदालत ने कहा है कि केन्द्र सरकार धन आबंटन के तुरंत बाद संबंधित राज्य सरकारों को उच्च न्यायालयों से परामर्श करके विशेष अदालत गठित करे, साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा है कि केंद्र ये सुनिश्चित करे कि इस मामले में एक मार्च से काम शुरू हो जाएगा।

जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने केन्द्र को सांसदों और विधायकों की संलिप्तता वाले लंबित आपराधिक मामलों की डीटेल इकट्ठा करने के लिये दो महीने का समय दिया है।

कोर्ट ने इस मामले में केन्द्र के अतिरिक्त हलफनामे का अवलोकन किया है। जिसमें सरकार ने नेताओं की संलिप्तता वाले मामलों के लिए इस समय 12 विशेष अदालतें गठित करने का प्रस्ताव किया है। हलफनामे में केंद्र की तरफ से कहा गया है कि विशेष अदालत के गठन के लिए राज्य सरकारों को 7.8 करोड रुपए आबंटित किए जाएंगे। इसपर पीठ ने कहा कि आनुपातिक आधार पर सभी राज्यों को जल्द ही राशि आबंटित की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषी नेताओं पर चुनाव लड़ने के लिए उम्र भर का प्रतिबंध लगाने के मुख्य मुद्दे पर मार्च के महीने में सुनवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता के वकीलों ने जब ये दलील दी कि केन्द्र को और अधिक विशेष अदालतें गठित करनी चाहिए। इसपर कोर्ट ने सख्त लहजे में केंद्र सरकार से अपराधिक छवि वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की बात कही।