मुस्लिम महिलाओं में उठी खतना(FGM) खत्म करने की मांग, PM मोदी को लिखा खत

Edited by: Editor Updated: 24 Aug 2017 | 12:08 AM
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नई दिल्ली। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं का आत्मविश्वास काफी मजबूत हुआ है। शायद यही वजह है कि अब उन्होंने इस्लाम में जारी और कुप्रथाओं के खिलाफ भी आवाज बुलंद करना शुरु कर दिया है। इसी क्रम में मुस्लिम महिलाओं ने पीएम नरेन्द्र मोदी को एक खुला खत लिखकर महिलाओं के खतने जैसी कुप्रथा को भी बंद करवाने की गुजारिश की है।

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आपको बता दें कि इस्लाम में महिलाओं का खतना एक ऐसी कुप्रथा है, जिससे न सिर्फ महिलाएं अपना मानसिक संतुलन खो देती हैं, बल्कि उनके शरीर को बेहद नुकसान भी पहुंचता है। जो लड़कियां बच भी जाती हैं, इस कुप्रथा से जुड़ी दर्दनाक यादें ताउम्र उनके साथ रहती है। दुनिया भर के कई समुदाय इस कुप्रथा को सदियों से करते आ रहे हैं।

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लेकिन अब इस कुप्रथा को रोकने के लिए कुछ महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है और इसके खिलाफ एक जुट होकर लड़ रही हैं। बोहरा समुदाय की मासूमा रानाल्वी ने देश के प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक खुला ख़त लिखकर इस कुप्रथा को रोकने की मांग की है।

मुस्लिम महिला ने पीएम मोदी को लिखा खतः

मासूमा रानाल्वी ने अपने खत में लिखा स्वतंत्रता दिवस पर आपने मुस्लिम महिलाओं के दुखों और कष्टों पर बात की थी। ट्रिपल तलाक को आपने Anti-Women कहा था, सुनकर बहुत अच्छा लगा था। हम औरतों को तब तक पूरी आजादी नहीं मिल सकती जब तक हमारा बलात्कार होता रहेगा, हमें संस्कृति, परंपरा और धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया जाता रहेगा।

हमारा संविधान सभी को समान अधिकार देने की बात करता है, पर असल में जब भी किसी बच्ची को गर्भ में मारा जाता है, जब भी किसी बहु को दहेज के नाम पर जलाया जाता है, जब भी किसी बच्ची की जबरन शादी करवा दी जाती है, जब भी किसी लड़की के साथ छेड़खानी होती है या उसके साथ बलात्कार किया जाता है, हर बार इस समानता के अधिकार का हनन किया जाता है।

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मैं आपको Female Genital Mutilation (FGM) या खतना प्रथा के बारे में बताना चाहती हूं, मैं इस खत के द्वारा आपका ध्यान इस भयानक प्रथा की तरफ खींचना चाहती हूं। बोहरा समुदाय में सालों से ‘खतना प्रथा’ या ‘खफ्ज प्रथा’ का पालन किया जा रहा है। बोहरा, शिया मुस्लिम हैं, जिनकी संख्या लगभग 2 मिलियन है और ये महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बसे हैं। मैं बताती हूं कि मेरे समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ क्या होता है।

जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, उसकी मां या दादी उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं। बच्ची को ये भी नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है। दाई या आया या वो डॉक्टर उसके Clitoris को काट देते हैं। इस प्रथा का दर्द ताउम्र के लिए उस बच्ची के साथ रह जाता है। इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला के Sexual Desires को दबाना। मासूमा ने बताया कि ‘FGM महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकार का हनन है।