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देश की अर्थव्यवस्था का हाल बेहाल, लेकिन मोदी सरकार और गोदी मीडिया को हनीप्रीत पसंद है

Edited By: Ankur Maurya
Updated On : 2017-09-26 09:51:28
देश की अर्थव्यवस्था का हाल बेहाल, लेकिन मोदी सरकार और गोदी मीडिया को हनीप्रीत पसंद है
देश की अर्थव्यवस्था का हाल बेहाल, लेकिन मोदी सरकार और गोदी मीडिया को हनीप्रीत पसंद है

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी से उतरती हुई नजर आ रही है और पूरा देश आर्थिक मंदी की और बढ़ रहा है जो आने वाले समय में देश के लिए खतरा पैदा कर सकता है, लेकिन देश का मीडिया डेरा सच्चा सैदा के प्रमुख राम रहीम की खास हनीप्रीत को बढ़ा चढ़ाकर दिखा रहा है पर बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर सरकार से कोई सवाल नहीं कर रहा। सवाल ये कि क्या अब देश में हनीप्रीत ही अहम मुद्दा बन गया है ? और क्या देश की जनता को गुमराह किया जा रहा है ?

दरअसल, एक तरफ हनीप्रीत का सैक्स सकैंडल और उसकी अश्लीलता वहीं दूसरी तरफ लुढ़कती देश की अर्थव्यवस्था, तेज़ी से घटते रोजगार, बुलेट से भी तेज़ भागती मंहगाई दरें, राष्ट्रीय निवेश की शून्यता से बंद हो चुकी स्मॉल और मीडियम स्केल इंडस्ट्री, आग लगाते पेट्रोल और डीजल के दाम बातें कई है लेकिन इस लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था की ओर कोई ध्यान नहीं देना चाहता क्योंकि एक तरफ हनीप्रीत का जादू तो दूसरी तरफ मोदी सरकार की चका चौंद, एक तरफ बिना जानकारी के किस्सा बनाया जा रहा है तो दूसरी तरफ सारे तथ्यों की मौजूदगी में खामोशी।

जहां हनीप्रीत से निकले सवालों को जनता से कोई सरोकरा नहीं वहीं दूसरी तरफ सरकार के हर सवालों का जनता का सरोकार। तो क्या अब पुलिस, प्रशासन, नौकरशाह, मीडिया की जरूरत बदल चुकी है ? क्योंकि बेरोजगारी के सवाल पर हनीप्रीत का चरित्र हनन देखा और दिखाया जा रहा है। पेट्रोल की बढ़ती किमतों पर हनीप्रीत के नेपाल में होने या ना होने की बात कही जा रहा है। गिरती GDP पर रेपिस्ट गुरमीत राम रहीम और हनीप्रीत के संबंध मायने रखने लगे है और 10 लाख करोड़ पार चुके NPA की लूट पर डेरा की अरबो की संपति हावी हो चली है।

इन सब बातों से जाहिर है ऐसे बहुत सारे सवाल है जो किसी को भी परेशान कर सकते हैं कि आखिर जनता की जरूरतों से इतर हनीप्रीत की तलाश में गृह मंत्रालय तक सक्रिय हो जाता हैं। वहीं 24 घंटे और सातों दिन खबरों में हनीप्रीत की चकाचौंद, हनीप्रीत की अश्लीलता, हनीप्रीत के चरित्र हनन में ही दुनिया के पायदान पर पिछड़ता देश क्यों रुची ले रहा है ?

2014 में अपने चुनावी वादों में पीएम मोदी ने अर्थव्यवस्था में बहार लाने का दावा कई-कई बार चीख-चीख कर किया, लेकिन मोदी सरकार के 3 साल बाद मंहगाई से लेकर GDP और रोजगार से लेकर NPA के मुद्दे पर अगर अर्थव्यवस्था को संकट में खड़ी हो रही हैं तो ये चिंता पीएम मोदी को लाजमी है और जब 2019 का चुनाव नजदीक है तो सुस्त अर्थव्यवस्था मोदी सरकार की तमाम योजना को पटरी से उतार सकती है। तो ऐसे में जनता को राम रहीम और हनीप्रीत की ख़बरों में खपा कर देश में ऐसा वातवरण बनाया जा रहै है जिसमें चुनौतियां छिप जाएं, क्योंकि अगर अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी तो देश को जवाब देना मुश्किल होगा और उस वक्त सबकी नज़रे सिर्फ एक बात पर टिक जाएंगी कि क्या मोदी ब्रांड बड़ा है या फिर आर्थिक मुद्दे ?


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