कहानी उसकी, जो बना भारत के इतिहास में सबसे कम बोलने वाला प्रधानमंत्री

Edited by: Ankur_maurya Updated: 26 Sep 2017 | 12:04 PM
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नई दिल्ली। भारत ने कई प्रधानमंत्री देखे लेकिन एक ऐसा प्रधानमंत्री जिसने इतिहास के पन्नों उन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया जिसने देश को आर्थिक मंदी से उबारा था, जी हां पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का 26 सितंबर को जन्मदिवस है। इस मौक पर हम आपको बता तें है कैसे एक किसान का लड़का बना देश का प्रधानमंत्री।

डॉ मनमोहन सिंह का जन्म भारत और पाकिस्तान के अलग होने से पहले ही 1932 में पंजाब के गाह बेगल गांव हुआ था। पार्टीशन के बाद उनका परिवार भारत आ गया था। अपनी जन्म तिथि के बारे में मनमोहन कहते हैं 26 सितंबर इसलिए मानी जाती है क्योंकि ये डेट स्कूल के रिकार्ड में हैं। मनमोहन सिंह के घर के हालात बहुत अच्छे नहीं थे आर्थिक तंगी की वजह से उनकी पढ़ाई में दिक्कतें आती रहती थी, लेकिन वह पढ़ने में इतने अच्छे थे कि उन्हें स्कॉलरशिप मिलती रही।

डॉ. सिंह ने 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। अपने शैक्षिक करियर के लिए वे पंजाब से यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज, ब्रिटेन गए, जहां उन्होंने 1957 में अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी के साथ ऑनर्स डिग्री अर्जित की। इसके बाद मनमोहन सिंह ने 1962 में ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के नफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी. फिल की।

उनकी शैक्षिक उपलब्धियां उस दौरान बढ़ीं जब वे पंजाब विश्वविद्यालय और प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के फैकल्टी में रहे। इसी दौरान इन्होंने यूएनसीटीएडी सेक्रेटेरिएट में भी कुछ समय के लिए काम किया। उन्हें 1987 और 1990 के बीच जिनीवा में साउथ कमिशन के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया।

डॉ. सिंह 1971 में उस समय भारत सरकार में आए जब उन्हें वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। इसके बाद इन्हें 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया। डॉ. सिंह ने अनेक सरकारी पदों पर कार्य किया है - जिनमें वित्त मंत्रालय में सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधान मंत्री के सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के पद शामिल हैं।

स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में बदलाव का दौर तब आया जब डॉ. सिंह ने 1991 से 1996 के बीच पांच साल के लिए भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। आर्थिक सुधारों की व्यापक नीति को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका की अब दुनियाभर में सराहना की जा रही है। भारत की उन दिनों की लोकप्रियता को डॉ. सिंह के व्यक्तित्व से जोड़ कर देखा जाता है।

अपने राजनीतिक करियर में, डॉ. सिंह 1991 से भारतीय संसद के राज्य सभा के सदस्य रहे हैं। वहां वे 1998 और 2004 के बीच विपक्ष के नेता रहे। डॉ. मनमोहन सिंह ने 2004 के आम चुनावों के बाद 22 मई को प्रधान मंत्री पद की शपथ ली तथा 22 मई 2009 को दूसरे कार्यकाल के लिए पद की शपथ ली।

भारत के इतिहास में अगर बहुत ही कम बोलने वाला पीएम कोई हुआ है तो वो बेशक डॉ मनमोहन सिंह ही हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि शिक्षित और समझदार व्यक्ति काम के वक्त ही बोलते है। मनमोहन सिंह जब भी बोलते है वो सुर्खियां बन जाती थी।