नेहरू की वो बड़ी गलती जिससे देश को भुगतनी पड़ रही है ये समस्या

Edited by: Ankur_maurya Updated: 14 Nov 2017 | 04:12 PM
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नई दिल्ली। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाला नेहरू की मंगलवार को जयंती मनाई जा रही है। देश के पहले प्रधानमंत्री होने के कारण उनके सामने कई चुनौतियां थी जिन्हें उनको उनका सामना करना था, लेकिन नेहरू ने कुछ कई ऐसी गलतियां कर बैठे थे जिनका हमें आज भी सामना करना पड़ रहा है। हम आपको नेहरु की उस गलति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी वजह से हमें कश्मीर की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

ये दावा किया जाता है कि नेहरू की गलतियों के कारण ही हमें आज भी कश्मीर समस्या से जूझना पड़ रहा है। दरअसल, भारत जब आजाद हुआ तो यहां 565 रियासतें भी आजाद हो रही थी। उनके सामने यह विकल्प था कि वो या तो भारत में शामिल हो जायें या पाकिस्तान से जुड़ जाएं, लेकिन कश्मीर के महाराज हरि सिंह कश्मीर को आजाद मुल्क रखना चाहते थे इसलिए उन्होंने 15 अगस्त 1947 के बाद भी कोई फैसला नहीं किया।

लेकिन हरि सिंह को यह अंदाजा था कि पाकिस्तान, कश्मीर को अपने साथ जोड़ने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, इसलिए 22 अक्टूबर 1947 को हथियारों से लैस कबायिलयों ने पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर पर हमला बोल दिया तब महाराजा हरि सिंह ने भारत ने सैनिक मदद मांगी और भारत में विलय का फैसला भी ले लिया।

कश्मीर में दुश्मन को पूरी तरह खत्म करने के लिए सेना हाईकमान की इजाजत का इंतजार करती रही, लेकिन नेहरु ने इस बात की इजाजत देने के बजाय संयुक्त राष्ट्र का दरावाजा खटखटाना बेहतर समझा और इस गलती की वजह से भारत आज तक अपना भूभाग वापस नहीं ले पाया।

नेहरु ने माउंटबेटन की सलाह पर 31 दिसंबर 1947 को संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तन के खिलाफ शिकायत भेजी, इसके बाद से ही कश्मीर एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बन गया। बाद में संयुक्त राष्ट्र मे जो हुआ वो नेहरू के लिए किसी सदमें से कम नहीं था। सुरक्षा परिषद में अमेरिका और ब्रिटेन ने अपने राजनीतिक हितों को साधने में लग गए। जिसका नतीजा यह हुआ कि नेहरू को भी अपने फैसले पर अफसोस होने लगा था की जब कई सालों बाद जब नेहरू से कश्मीर में संयुक्त राष्टा की मध्यस्था के बारे मे सवाल किया गया तो वह इसेस इंकार करने लगे।