2005 में BJP ने किया था करेंसी बदलने का विरोध, फिर अब क्यों बदल दिए नोट? आखिर क्या है ये खेल?

Author: Hindi Khabar
Updated On : 2016-11-12 09:32:03
2005 में BJP ने किया था करेंसी बदलने का विरोध, फिर अब क्यों बदल दिए नोट? आखिर क्या है ये खेल?

नई दिल्ली। 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश को दंग करते हुए अचानक से 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए। मोदी द्वारा उठाए गए फैसले पर कई सवाल खड़े हुए है, विपक्ष के साथ कई लोगों का यह मानना है कि अचानक लिए गए इस फैसले से देश की जनता का क्या होगा, लेकिन केंद्र सरकार के इस कदम को बीजेपी द्वारा खूब सराहा जा रहा है। बीजेपी का कहना है कि इस कदम से कालेधन रखने वालों के पसीने छूट जाएंगे। हालांकि जो पार्टी आज करेंसी बदलने के फैसले में सरकार के पक्ष में है वो पार्टी एक समय में निर्णय के खिलाफ थी।

साल 2013 में आई एक रिपोर्ट पर नजर डालें तो पता चलता है कि उस समय बीजेपी की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने यूपीए सरकार के बड़े करेंसी नोटों के वापस लेने के फैसले का खुलकर विरोध किया था। उस समय मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार थे और जोरों-शोरों से अपना प्रचार करने में जुटे हुए थे। चुनावों की तारीख नजदीक थी और केंद्र की सत्ता पर काबिज कांग्रेस सरकार ने साल 2005 से पहले के करेंसी नोट वापस लेने की घोषणा की थी।

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उस समय विपक्ष यानी बीजेपी ने तत्कालीन सरकार की इस फैसले की आलोचना की। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि यूपीए सरकार ने कालेधन पर काबू पाने के नाम पर साल 2005 से पहले के सभी करेंसी नोट वापस लेने का जो निर्णय किया है वह आम आदमी को परेशान करने के लिए लिया गया है। उस समय बीजेपी ने कांग्रेस पर अपने चहेतों को बचाने का आरोप भी लगाया था, जिनका भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद के बराबर का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा है।

बीजेपी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार के इस फैसले से गरीब किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। तो अब सवाल खड़ा हो रहा है कि साल 2016 में लिए गए मोदी के अचानक लिए गए फैसले से गरीब की रोजी-रोटी पर सकंट नहीं आया?

उस समय बीजेपी की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा था सरकार का यह फैसला विदेशी बैंकों में अमेरिकी डॉलर, जर्मन ड्यूश मार्क और फ्रांसिसी फ्रांक आदि करेंसियों के रूप में जमा भारतीयों के कालेधन में से एक रुपया भी वापस नहीं ला सकेगी।

लेखी ने आगे कहा था कि विदेशों में जमा कालाधन लाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है, कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए सिर्फ एक दांव खेल रही है। इस निर्णय से दूर दराज के इलाकों के गरीबों की मेहनत की कमाई पर पानी फिर जाएगा। लेखी ने तर्क दिया था कि आपातकाल के लिए एक गरीब अपने घर में कुछ पैसे रखता है और वह बड़े नोट होते है।

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उन्होंने कहा था कि गरीब और आदिवासी लोग पाई-पाई जमा करके अपनी बेटियों की शादी ब्याह और अन्य वक्त जरूरत के लिए घर के आटे-दाल के डिब्बों आदि में धन छिपा कर रखते हैं। ऐसे में अधिकतर लोग अपना पैसा साल 2005 के बाद की करेंसी से नहीं बदल पाएंगे। कई लोग तो दलालों का शिकार हो जाएंगे।

बीजेपी ने तब तत्कालीन यूपीए सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि देश की बहुत बड़ी आबादी ऐसी होगी जिसे इस बात की सूचना उस समय लगेगी जब नोट बदलने की तारीख खत्म हो चुकी होगी और गरीब खून के आंसू रोने के लिए मजबूर हो जाएगा।

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गौरतलब है कि कालेधन और नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने साल 2005 से पहले जारी सभी करेंसी नोट वापस लेने का फैसला किया था। इसके तहत 500 रुपए व 1000 रुपए सहित सभी मूल्य के नोट वापस लिए जाने का फैसला किया था। उस समय प्रेस कांफ्रेंस में रिजर्व बैंक की ओर से कहा गया था कि 1 अप्रैल 2014 से लोगों को इस तह के नोट बदलने के लिए बैंक से संपर्क करना होगा।

स्वामी चक्रपाणि से संपादक अतुल अग्रवाल की खास बातचीत देखिए वीडियो...


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