उत्तराखंड: ठेकेदारों ने किया ई-टेंडरिंग का विरोध, रोके सभी पुराने निर्माण कार्य

Edited by: Shanker_Mishra Updated: 30 Jan 2018 | 08:09 PM
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देहरादून। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में एक बार फिर त्रिवेन्द्र सरकार के सामने बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। उत्तराखंड में देहरादून ठेकेदार कल्याण समिति के बैनर तले प्रदेश के ठेकेदारों ने ई- टेंडरिंग का विरोध किया। ठेकेदारों ने पुराने निर्माण कार्य भी जहां के तहां रोक दिये हैं।

अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर लम्बे समय से आंदोलन कर रहे उत्तराखण्ड के ठेकेदार अब सड़कों पर उतर आए हैं। देहरादून ठेकेदार कल्याण समिति के बैनर तले ठेकेदारों ने राजधानी में बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री आवास कूच की भी कोशिश की, जिसमें बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आये ठेकेदार शामिल हुए। ठेकेदारों का आरोप है कि सरकार ने पिछले 8 महिने से उनका भुगतान नहीं किया है।

वहीं, ठेकेदारों के पक्ष में बीजेपी के विधायक भी खड़े नजर आए। बीजेपी विधायकों ने भी ई टेंडरिंग के मसले पर सरकार से रोल बैक की मांग की। साथ ही विपक्षी कांग्रेस का कहना है कि सरकार पूंजीपतियों को ठेके देकर प्रदेश के छोटे ठेकेदारों के पेट में लात मारने का काम कर रही है।

हालांकि, ठेकेदारों की मांगों पर सरकार फिलहाल झुकने को तैयार नहीं दिखाई दे रही है। सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने साफ शब्दों में कहा कि ई-टेंडर का फैसला प्रदेश की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से लिया गया है।

फिलहाल, त्रिवेन्द्र सरकार को प्रदेश के ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान करना है और बकाया भुगतान व ई-टेंडरिंग के मुद्दों को लेकर ठेकेदार सड़कों पर हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या त्रिवेन्द्र सरकार के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है? आखिर ई- टेंडरिंग का विरोध क्यों?